Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
जीव का लक्ष्य · पृष्ठ 61
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1जीव अंश आनन्द गोविंद राधे।
2याते जीव चाहे आनन्द बता दे॥ 687॥
3जीव चाहे आनन्द गोविंद राधे।
4याते तदर्थ सब कर्म करा दे॥ 688॥
5जीव भी है चित् गोविंद राधे।
6आनन्द ब्रह्म भी चित् है बता दे॥ 689॥
7याते जीव आनन्द गोविंद राधे।
8सम्बन्ध है अनुकूल बता दे॥ 690॥
9आनन्द पाने की गोविंद राधे।
10जीव में नित्य आकांक्षा बता दे॥ 691॥
11याते जीव मात्र में है गोविंद राधे।
12आनन्द भोग की योग्यता बता दे॥ 692॥
13ब्रह्म तो है आनन्द गोविंद राधे।
14सत अरु चित हैं विशेषण बता दे॥ 693॥
15सत् का है अर्थ नित्य गोविंद राधे।
16याते ब्रह्म आनन्द नित्य बता दे॥ 694॥
17चित् अर्थ चेतन गोविंद राधे।
18याते ब्रह्म आनन्द चेतन बता दे॥ 695॥
19चेतन आनन्द गोविंद राधे।
20याते आनन्द जीवों को दिला दे॥ 696॥
21जो ब्रह्म सत्स्वरूप गोविंद राधे।
22वही ब्रह्म चिदानन्द रूप भी बता दे॥ 697॥
23जो ब्रह्म चित्स्वरू प गोविंद राधे।
24वही ब्रह्म सदानन्द रूप भी बता दे॥ 698॥