Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
जीव का लक्ष्य · पृष्ठ 60
Reading 72 of 516 · Source nos. 675–686 · Source PDF 77
1धन का है फल धर्म गोविंद राधे।
2काम आदि नहिं यह सब को बता दे॥ 675॥
3काम फल निर्वाह गोविंद राधे।
4इन्द्रिय सुख भोग नाहिं बता दे॥ 676॥
5आत्मा ते जो सुख गोविंद राधे।
6मिले उस सुख को सात्विक बता दे॥ 677॥
7विषयों ते जो सुख गोविंद राधे।
8मिले उस सुख को राजस बता दे॥ 678॥
9मोहादि का जो सुख गोविंद राधे।
10मिले उस सुख को तामस बता दे॥ 679॥
11हरि हरिजन सुख गोविंद राधे।
12सर्वश्रेष्ठ शास्त्र जिसे निर्गुण बता दे॥ 680॥
13ईश्वरीय सुख बिम्ब गोविंद राधे।
14स्वर्ग मर्त्य सुख प्रतिबिम्ब बता दे॥ 681॥
15जड़ जड़ योग सुख गोविंद राधे।
16इन्द्रियों ते विषयों का भोग बता दे॥ 682॥
17जड़ चेतन सुख गोविंद राधे।
18मन आत्मा की समाधि है बता दे॥ 683॥
19चेतन चेतन गोविंद राधे।
20सुख दिव्य मन युक्त श्याम ते मिला दे॥ 684॥
21गोविंद आनन्द गोविंद राधे।
22पर्यायवाची हैं वेद बता दे॥ 685॥
23सन्मात्र चिन्मात्र गोविंद राधे।
24आनन्दमात्र हैं कृष्ण बता दे॥ 686॥