Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
जीव का लक्ष्य · पृष्ठ 59
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1मीन को जल ज्यों गोविंद राधे।
2प्रिय त्यों जीव को भी हरि हैं बता दे॥ 663॥
3श्रीकृष्ण भगवान गोविंद राधे।
4सब की आत्मा की आत्मा बता दे॥ 664॥
5प्राणों के प्राण अरु गोविंद राधे।
6जीवों के जीवन कृष्ण हैं बता दे॥ 665॥
7दिव्य हरिधाम में तो गोविंद राधे।
8हरि दासत्व जीव लक्ष्य है बता दे॥ 666॥
9जीव चह कृष्णानन्द गोविंद राधे।
10जो है अनन्त दिव्य नित्य बता दे॥ 667॥
11जीव तो सदा ते ही गोविंद राधे।
12आनन्ददास था है रहेगा बता दे॥ 668॥
13एक है प्रवृत्ति मार्ग गोविंद राधे।
14जाते मिलें सुख जग के बता दे॥ 669॥
15एक है निवृत्ति मार्ग गोविंद राधे।
16जाते मिलें सुख हरि के बता दे॥ 670॥
17निवृत्ति मार्ग दो हैं गोविंद राधे।
18एक ते मिले अपवर्ग बता दे॥ 671॥
19एक निवृत्ति मार्ग गोविंद राधे।
20दे कृष्णप्रेम निष्काम बता दे॥ 672॥
21धर्म अर्थ काम मोक्ष गोविंद राधे।
22चार पुरुषार्थ पंचम प्रेम बता दे॥ 673॥
23धर्म का है फल मोक्ष गोविंद राधे।
24धन आदि लाभ नहिं सब को बता दे॥ 674॥