Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
जीव का लक्ष्य · पृष्ठ 58
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1आत्म हित कृष्ण प्रेम गोविंद राधे।
2सोई है सच्चा सुख श्रेय बता दे॥ 651॥
3बौद्धों का तत्त्ववाद गोविंद राधे।
4सत् की ही देता है शिक्षा बता दे॥ 652॥
5अद्वैतियों का वाद गोविंद राधे।
6चित् की ही देता है शिक्षा बता दे॥ 653॥
7वैष्णवों का भक्तिवाद गोविंद राधे।
8शिक्षा आनन्द की ही देता है बता दे॥ 654॥
9सांख्य अरु योग में तो गोविंद राधे।
10आनन्द सात्विक वृत्ति बता दे॥ 655॥
11श्रीकृष्ण भक्ति में तो गोविंद राधे।
12आनन्द दिव्य सत्व वृत्ति बता दे॥ 656॥
13पशु पक्षी कीट आदि गोविंद राधे।
14आनन्द ही के हेतु व्यग्र बता दे॥ 657॥
15जीव की दशा ऐसी गोविंद राधे।
16सिन्धु बिच मीन जैसे प्यासी बता दे॥ 658॥
17आनन्दसिन्धु हरि गोविंद राधे।
18मध्य रहे मत्स्य जीव प्यासा बता दे॥ 659॥
19ऐसे ही प्राणीमात्र गोविंद राधे।
20ज्ञान के हेतु भी हैं व्यग्र बता दे॥ 660॥
21ऐसे ही प्राणीमात्र गोविंद राधे।
22जीवन के हेतु भी हैं व्यग्र बता दे॥ 661॥
23नास्तिक भी चाहे यह गोविंद राधे।
24सदा रहुँ कभु नहिं मरूँ मैं बता दे॥ 662॥