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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

दैन्य माधुरी · पृष्ठ 54

Reading 67 of 516 · Source nos. 631–642 · Source PDF 71

1राधे रानी कृपा करि गोविंद राधे।

2मोहूँ ब्रजरस का चस्का लगा दे॥ 631॥

3ब्रजधाम वास करुँ गोविंद राधे।

4दिव्य दृष्टि दै के ब्रजधाम दिखा दे॥ 632॥

5नवल निकुंजनि गोविंद राधे।

6विहरूँ स्वामिनि संग बता दे॥ 633॥

7गहवर वन पथ गोविंद राधे।

8देउँ बुहारी दिन रात बता दे॥ 634॥

9प्रेम दिवानी बनि गोविंद राधे।

10गाउँ रो के राधे राधे राधे बता दे॥ 635॥

11मधुमती वीणा ते गोविंद राधे।

12श्याम गुण गाती राधा दरस दिखा दे॥ 636॥

13श्याम की वेणु अरु गोविंद राधे।

14श्यामा की वीणा में होड़ हो बता दे॥ 637॥

15रससिन्धुसार रूप गोविंद राधे।

16कब देखुँ श्री मुखचन्द्र बता दे॥ 638॥

17कब राधा केलि कुंज गोविंद राधे।

18भवन की बनूँगी बुहारी बता दे॥ 639॥

19राधे रानी स्वामिनी गोविंद राधे।

20महलटहलिनी मोहूँ बना दे॥ 640॥

21राधे रानी स्वामिनी गोविंद राधे।

22महल टहल कोई भी दिला दे॥ 641॥

23महल टहल ना दे गोविंद राधे।

24जो तो पुष्प वाटिका की टहल दिला दे॥ 642॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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