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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

दैन्य माधुरी · पृष्ठ 53

Reading 66 of 516 · Source nos. 619–630 · Source PDF 70

1वह दिन कब आये गोविंद राधे।

2जब हरिध्यान तनु स्वेद बहा दे॥ 619॥

3वह दिन कब आये गोविंद राधे।

4जब हरिध्यान तनु खंभ बना दे॥ 620॥

5वह दिन कब आये गोविंद राधे।

6जब हरि बिनु पल कलप जना दे॥ 621॥

7वह दिन कब आये गोविंद राधे।

8जब हरि बिनु जग शून्य बना दे॥ 622॥

9वह दिन कब आये गोविंद राधे।

10जब हाय पिय कहि तरु ज्यों गिरा दे॥ 623॥

11तेरा नाम गुन गाते गोविंद राधे।

12ऐसा प्रेम बाढ़ै सुधि बुधि बिसरा दे॥ 624॥

13रहा नहिं जाये मोते गोविंद राधे।

14तुम बिन एक पल ऐसी बना दे॥ 625॥

15श्यामा तेरे धाम आई गोविंद राधे।

16पात्र नहिं प्रेम कैसे माँगूँ बता दे॥ 626॥

17श्यामा तेरे धाम आई गोविंद राधे।

18बहुत सुना था नाम कछु भिक्षा दे॥ 627॥

19श्यामा तेरे धाम आई गोविंद राधे।

20तव अपयश खाली हाथ लौटा दे॥ 628॥

21खाली हाथ लौटूँ जो तो गोविंद राधे।

22लोग पूछें पाया क्या बताऊँ क्या बता दे॥ 629॥

23काहू ते बताऊँ नहिं गोविंद राधे।

24ब्रजरस की इक बूँद पिला दे॥ 630॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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