Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
दैन्य माधुरी · पृष्ठ 52
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1तेरे मेरे बीच में है गोविंद राधे।
2नाम ही ऐसा तेरा तुझते मिला दे॥ 607॥
3हरि तोहिं आना होगा गोविंद राधे।
4मेरा बल है तेरा नाम बता दे॥ 608॥
5तेरा नाम चिंतामणि गोविंद राधे।
6पूर्ण शुद्ध नित्य मुक्त रसिक बता दे॥ 609॥
7राधे राधे गावूँ ध्यावूँ गोविंद राधे।
8रसिकों ते ऐसा छूमंतर करा दे॥ 610॥
9श्वास श्वास नाम जपुँ गोविंद राधे।
10नामी नाम भेद नहिं विश्वास ला दे॥ 611॥
11नाम सुधा पीके नित गोविंद राधे।
12मस्ती में नाचूँ गाऊँ लज्जा भगा दे॥ 612॥
13तेरा नाम गाते गाते गोविंद राधे।
14सात्त्विक भाव उद्रेक करा दे॥ 613॥
15वह दिन कब आये गोविंद राधे।
16जब हरि नाम लै के आँसू बहा दे॥ 614॥
17वह दिन कब आये गोविंद राधे।
18जब नाम वाणी गद्गद् करा दे॥ 615॥
19वह दिन कब आये गोविंद राधे।
20जब कंठ भर आये नाम लै बता दे॥ 616॥
21वह दिन कब आये गोविंद राधे।
22जब हरिनाम रोमांच करा दे॥ 617॥
23वह दिन कब आये गोविंद राधे।
24जब हरिध्यान तनु कम्प करा दे॥ 618॥