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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

दैन्य माधुरी · पृष्ठ 51

Reading 64 of 516 · Source nos. 595–606 · Source PDF 68

1मोते तू प्यार करु गोविंद राधे।

2जग यदि हँसे वाय तू हँसवा दे॥ 595॥

3तेरा मेरा प्यार अमर गोविंद राधे।

4स्वार्थी संसार ते पीछा छुड़ा दे॥ 596॥

5तेरी मेरी यारी में जो गोविंद राधे।

6बाधा बनि आवे वाय सबक सिखा दे॥ 597॥

7तेरे मेरे बीच में जो गोविंद राधे।

8बाधा बनि आवे वाय लठिया दिखा दे॥ 598॥

9तेरे मेरे प्यार में जो गोविंद राधे।

10आड़े आवे आड़े हाथों धूल चटा दे॥ 599॥

11तेरे मेरे प्यार में जो गोविंद राधे।

12रोड़ा अटकाये वाय यम ते मिला दे॥ 600॥

13तेरे मेरे प्यार में जो गोविंद राधे।

14टाँग अड़ाये वाको भौंह दिखा दे॥ 601॥

15तेरे मेरे प्यार में जो गोविंद राधे।

16नजर लगावे मुँह काला करा दे॥ 602॥

17तेरे मेरे बीच में जो गोविंद राधे।

18सैन चलावे वाय कमरी उढ़ा दे॥ 603॥

19तेरे मेरे बीच में जो गोविंद राधे।

20उलटा पढ़ावे वाय सीधा करा दे॥ 604॥

21तेरे मेरे बीच में जो गोविंद राधे।

22श्यामा प्यारी आवें पीतपट को बिछा दे॥ 605॥

23तेरे मेरे बीच में जो गोविंद राधे।

24ब्रजबामा आवे वाको स्वागत करा दे॥ 606॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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