Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
दैन्य माधुरी · पृष्ठ 50
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1तेरे मेरे बीच में है गोविंद राधे।
2पाप पुण्य बाधा वामें आग लगा दे॥ 583॥
3तेरे मेरे बीच में जो गोविंद राधे।
4नीच अज्ञान वाय “अ” को मिटा दे॥ 584॥
5तेरे मेरे बीच में जो गोविंद राधे।
6अज्ञान वाको स्वर्ग वास करा दे॥ 585॥
7तेरे मेरे बीच में जो गोविंद राधे।
8ज्ञान आवे वाय सायुज्य दिला दे॥ 586॥
9तेरे मेरे बीच में जो गोविंद राधे।
10काम आवे वाय कुबरी ते मिला दे॥ 587॥
11तेरे मेरे बीच में जो गोविंद राधे।
12माया की ग्रन्थि आवे कैंची चला दे॥ 588॥
13तेरे मेरे बीच में जो गोविंद राधे।
14माया सौत बैठी वाय चक्र दिखा दे॥ 589॥
15तेरे मेरे मिलन में गोविंद राधे।
16तेरी दासी बाधा वाय आँखि दिखा दे ॥ 590॥
17तेरे मेरे बीच में जो गोविंद राधे।
18माया तम बाधा वाय तेज ते भगा दे॥ 591॥
19तेरे मेरे बीच में जो गोविंद राधे।
20पर्दा पड़ा है वह पर्दा हटा दे॥ 592॥
21मैं हूँ अंश तू ही अंशी गोविंद राधे।
22मोते कौन पर्दा सब पर्दा हटा दे॥ 593॥
23तेरे मेरे प्यार को जो गोविंद राधे।
24संसारी रोके वाय अँगुठा दिखा दे॥ 594॥