Skip to main contentJagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
दैन्य माधुरी · पृष्ठ 55
Reading 68 of 516 · Source nos. 643–644 · Source PDF 72
1वाटिका टहल ना दे गोविंद राधे।
2जो तो निज दासी की टहल दिला दे॥ 643॥
3दासी की टहल ना दे गोविंद राधे।
4जो तो दासी दासी की टहल दिला दे॥ 644॥