लोड हो रहा है…लोड हुँदैछ…
Skip to main content
Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

दैन्य माधुरी · पृष्ठ 48

Reading 61 of 516 · Source nos. 559–570 · Source PDF 65

1मेरा चित चोरा नहिं गोविंद राधे।

2चित चोरी छोड़ दी का साफ बता दे॥ 559॥

3चोरी यदि छोड़ दिया गोविंद राधे।

4अच्छा किया मेरा चित सेवा में लगा दे॥ 560॥

5चोरी छोड़ा धन्यवाद गोविंद राधे।

6पहले चुराये चित वापस दिला दे॥ 561॥

7तोरा चित चोरा राधा गोविंद राधे।

8मोरा चित ले ले चाहे कछु दाम ना दे॥ 562॥

9दोउ दोउ चित चोरा गोविंद राधे।

10मोरा चित्त ले ले चाहे धन्यवाद ना दे॥ 563॥

11ले ले मेरा सब कछु गोविंद राधे।

12दे दे अपना सब कछु या दिला दे॥ 564॥

13मेरा सब कछु ले ले गोविंद राधे।

14तू अपना सब कछु दे या ना दे॥ 565॥

15तन मन धन तेरा गोविंद राधे।

16मैं हूँ कृतघ्नी तेरी वस्तु तोहिं ना दे॥ 566॥

17मैं तेरा मेरा तेरा गोविंद राधे।

18तेरी वस्तु को माना अपनी क्षमा दे॥ 567॥

19तन मन प्राण ले ले गोविंद राधे।

20निज वस्तु लेने में लज्जा क्यों बता दे॥ 568॥

21तन मन प्राण तेरा गोविंद राधे।

22सेवा में ले ले मोहिं सेवा दिला दे॥ 569॥

23तन मन प्राण तेरा गोविंद राधे।

24मैं तो हूँ सदा का भिखारी तोहिं का दे॥ 570॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

Source edition and PDF · Text version