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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

दैन्य माधुरी · पृष्ठ 47

Reading 60 of 516 · Source nos. 547–558 · Source PDF 64

1तू है जैसा मैं भी वैसा गोविंद राधे।

2दोनों ही हैं हरजाई जोरी बना दे॥ 547॥

3तेरे रिपु कंस आदि गोविंद राधे।

4मेरे रिपु काम आदि जोरी बना दे॥ 548॥

5तूने भुलाया मोहिं गोविंद राधे।

6मैंने भी भुलाया तोहिं जोरी बना दे॥ 549॥

7हम हैं अधम तुम गोविंद राधे।

8अधम उधारन जोरी बना दे॥ 550॥

9उर में रहें नित गोविंद राधे।

10हम और तुम साथ जोरी बना दे॥ 551॥

11हम रहें तुम में ही गोविंद राधे।

12तुम रहो हम में ही जोरी बना दे॥ 552॥

13हम तो हैं तव तनु गोविंद राधे।

14तुम मम आत्मा हो जोरी बना दे॥ 553॥

15वेद कहे हम तुम गोविंद राधे।

16दोनों हैं नित्य सखा जोरी बना दे॥ 554॥

17शिव शुक चित चोरा गोविंद राधे।

18मोरा चित चोरा नहिं काहे बता दे॥ 555॥

19चौर सिरमौर दोनों गोविंद राधे।

20दोनों मिलि मेरा चित चोरि दिखा दे॥ 556॥

21मेरा चित महाबली गोविंद राधे।

22या तो हार मान या तो तू ही हरा दे॥ 557॥

23या तो मेरा चित चोर गोविंद राधे।

24या तो चितचोर नाम कोष ते हटा दे॥ 558॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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