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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

दैन्य माधुरी · पृष्ठ 38

Reading 51 of 516 · Source nos. 439–450 · Source PDF 55

1माना अपराधी हूँ गोविंद राधे।

2कृपा शक्ति द्वारा मोहिं क्षमा करवा दे॥ 439॥

3जानि जानि पाप किये गोविंद राधे।

4अति दुःख पाये प्रभु अब तो क्षमा दे॥ 440॥

5पाप अनन्त किये गोविंद राधे।

6यम सोचे ऐसे पापी को दण्ड का दे॥ 441॥

7न्यायी जनि बनु हरि गोविंद राधे।

8मेरे लिये तो कृपालु बनि के कृपा दे॥ 442॥

9न्याय नहिं चाहता मैं गोविंद राधे।

10कृपा शक्ति द्वारा टुक कृपा करवा दे॥ 443॥

11तेरी हैं अनंत शक्ति गोविंद राधे।

12कृपा शक्ति पतितों के नाम लिखवा दे॥ 444॥

13पतितों के काम की है गोविंद राधे।

14तेरी कृपा शक्ति जो पावन बना दे॥ 445॥

15तेरी कृपा का तो गोविंद राधे।

16ओर है न छोर है अनन्त बता दे॥ 446॥

17अधम ते अधम मैं गोविंद राधे।

18अधम उधारन वादे निभा दे॥ 447॥

19तू तो था सदा ते मेरा गोविंद राधे।

20कृपा द्वारा मोहूँ कहँ अपना बना दे॥ 448॥

21मैंने अपनाया नहिं गोविंद राधे।

22तू ही अपना के अज्ञान मिटा दे॥ 449॥

23तेरी कृपा के बिना गोविंद राधे।

24पाय सका है कौन नाम बता दे॥ 450॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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