Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
दैन्य माधुरी · पृष्ठ 29
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1शिशु नहिं जाने पिता गोविंद राधे।
2कहा पिता वाय निज घर ते भगा दे॥ 331॥
3सुत पूछे पिता मोहिं गोविंद राधे।
4माया के हवाले कर दिया क्यों बता दे॥ 332॥
5तेरा सुत पिटा करे गोविंद राधे।
6तेरी दासी मारे तू देखे ध्यान ना दे॥ 333॥
7कैसा तू पिता है मेरा गोविंद राधे।
8सुत दयनीय दशा देखे ध्यान ना दे॥ 334॥
9सुत को सतावे दासी गोविंद राधे।
10देखा कैसे जाये माता पिता ते बता दे॥ 335॥
11दासी को चढ़ाया सिर गोविंद राधे।
12लख चौरासी द्वार सुत को घुमा दे॥ 336॥
13तेरे मेरे मिलन में गोविंद राधे।
14बाधा है तेरी दासी माया भगा दे॥ 337॥
15दासी ने सताया अति गोविंद राधे।
16कब लौं सहौं हौं दुख तू ही बता दे॥ 338॥
17दासी सुत दोनों में ते गोविंद राधे।
18एक अपना ले एक दूर भगा दे॥ 339॥
19शरण में आजा कहे गोविंद राधे।
20पहले तो माया ते पीछा छुड़ा दे॥ 340॥
21शरण में आजा कहे गोविंद राधे।
22नानी याद आये जीव बन के दिखा दे॥ 341॥
23शरणागत पै गोविंद राधे।
24कृपा करो यह निज नियम हटा दे॥ 342॥