Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
दैन्य माधुरी · पृष्ठ 28
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1काहे कहे तू है मेरा गोविंद राधे।
2यदि मैं हूँ तेरा ज्ञानानन्द दिला दे॥ 319॥
3तू ही है पिता माता गोविंद राधे।
4सुत प्रति पितु कर्त्तव्य निभा दे॥ 320॥
5तू ही माता पिता भ्राता गोविंद राधे।
6वेद बतलाता है नाता निभा दे॥ 321॥
7तू तो मेरा पिता हरि गोविंद राधे।
8एक बार मेरा सुत कहि के बुला दे॥ 322॥
9तू मेरा मैं तेरा गोविंद राधे।
10और सब मेरा तेरा मिथ्या बता दे॥ 323॥
11वेद अनुसार या तो गोविंद राधे।
12सुत मान या तो वेद मिथ्या बता दे॥ 324॥
13जो भी खाये माता पिता गोविंद राधे।
14सोइ खाद्य निज शिशु को भी खिला दे॥ 325॥
15तू तो भोगे दिव्य सुख गोविंद राधे।
16निज शिशु को काहे सुख लेश ना दे॥ 326॥
17तू तो कह तू है सुत गोविंद राधे।
18किन्तु ऐसा कैसा पिता सुत को भुला दे॥ 327॥
19पिता पुत्र साथ रहें गोविंद राधे।
20गले ना लगाया कैसा पिता है बता दे॥ 328॥
21शिशु नहिं जाने पिता गोविंद राधे।
22पिता पाले अरु पितु ज्ञान करा दे॥ 329॥
23शिशु नहिं जाने पिता गोविंद राधे।
24पिता सुत को न कूड़ेदान डला दे॥ 330॥