Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
दैन्य माधुरी · पृष्ठ 27
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1मेरी तेरी यारी यार गोविंद राधे।
2चोरी चोरी कब तक चलेगी बता दे॥ 307॥
3बार बार रोते गाते गोविंद राधे।
4युग बीते तोहिं सुनाई नाहिं का दे॥ 308॥
5सिर हैं सहस्र तेरे गोविंद राधे।
6सुने नहिं कान नहीं हैं का बता दे॥ 309॥
7तुमने दुख भोगा नहिं गोविंद राधे।
8याते आने में भी बड़ी देर लगा दे॥ 310॥
9तुम हो आनन्दकंद गोविंद राधे।
10तुम कहा जानो माया मारे रोने ना दे॥ 311॥
11जीव बनि देखो टुक गोविंद राधे।
12तीन ताप रात दिन मोहिं जला दे॥ 312॥
13निर्मल मन चाहे गोविंद राधे।
14अधम उधारन नाम हटा दे॥ 313॥
15द्वार द्वार भीख माँगा गोविंद राधे।
16तो भी तू दीन नहिं माने क्यों बता दे॥ 314॥
17कुलिश कठोर दोऊ गोविंद राधे।
18सेवें जन निशि दिन दर्शन ना दे॥ 315॥
19टेढ़ी गति मति तेरी गोविंद राधे।
20भृगु को बुलाऊँ तोहिं सीधा बना दे॥ 316॥
21बहुत नचाया तूने गोविंद राधे।
22प्रेम दे दे तो यह दास भी नचा दे॥ 317॥
23तू तो कह तू मेरा गोविंद राधे।
24यदि तेरा, मेरा कहि मोहिं बुला दे॥ 318॥