Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
दैन्य माधुरी · पृष्ठ 19
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1जो भी प्रेम करे तोसों गोविंद राधे।
2वाके चरणों की मोहिं धूल बना दे॥ 211॥
3रसिकों का संग दे दे गोविंद राधे।
4कर्मी योगी ज्ञानी संग ना दे ना दे ना दे॥ 212॥
5प्रेम दिला दे मोहिं गोविंद राधे।
6पात्र में भी छिद्र याते पात्र बना दे॥ 213॥
7दाता में कमी नहीं है गोविंद राधे।
8पात्र ही कुपात्र है सुपात्र बना दे॥ 214॥
9तेरी भक्ति के बिना गोविंद राधे।
10किसका मन शुद्ध हुआ नाम बता दे॥ 215॥
11रूपध्यान करुँ जब गोविंद राधे।
12नींद मेरी सौत बनि आके सुला दे॥ 216॥
13मुझसे न होगी भक्ति गोविंद राधे।
14मैंने हार मानी भक्ति शक्ति ते करा दे॥ 217॥
15सुनने में सरल भक्ति गोविंद राधे।
16करने में कठिन वाय सरल बना दे॥ 218॥
17तेरा नाम गुन गाऊँ गोविंद राधे।
18किन्तु मन अनुराग जागे ना जगा दे॥ 219॥
19नाम गुन लीला गाया गोविंद राधे।
20किन्तु मन पिघला न तू ही पिघला दे॥ 220॥
21तेरा नाम गाते गाते गोविंद राधे।
22जीभ घिस गई प्रेम अब तो दिला दे॥ 221॥
23नाम अपराध करुँ गोविंद राधे।
24बार बार अब अपराध ते बचा दे॥ 222॥