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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

दैन्य माधुरी · पृष्ठ 17

Reading 30 of 516 · Source nos. 187–198 · Source PDF 34

1मो सो कौन निर्बल गोविंद राधे।

2तो सो कौन बलवान नाम बता दे॥ 187॥

3मो सो कौन अपकारी गोविंद राधे।

4तो सो कौन पर उपकारी बता दे॥ 188॥

5तेरा सुत तेरी गोद गोविंद राधे।

6मोह निशा में सोया अब तो जगा दे॥ 189॥

7जगत बनाया और गोविंद राधे।

8उसमें समाया पै दिखाई काहे ना दे॥ 190॥

9जग जो बनाया तूने गोविंद राधे।

10सुख क्यों छुपाया अब माया को हटा दे॥ 191॥

11आजा मेरे सामने तू गोविंद राधे।

12काहे खेले खेल लुका छुपी का बता दे॥ 192॥

13पीछा नाहिं छोडूँ तेरा गोविंद राधे।

14झुँझला के चाहे निज चक्र चला दे॥ 193॥

15भटकत थकि गये गोविंद राधे।

16युगल चरण की शरण दिला दे॥ 194॥

17गोपियों ते रास किया गोविंद राधे।

18मोते रास जनि करु रास तो दिखा दे॥ 195॥

19घटि नाहिं जाये कछु गोविंद राधे।

20मेरी ओर लखि दोउ टुक मुसका दे॥ 196॥

21तेरा कहा घटि जाये गोविंद राधे।

22अकारण करु णा का द्वार खुलवा दे॥ 197॥

23तुझसा उदार नाहिं गोविंद राधे।

24जो बिनु सेवा अपने आप को लुटा दे॥ 198॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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