Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
दैन्य माधुरी · पृष्ठ 13
Reading 26 of 516 · Source nos. 139–150 · Source PDF 30
1अर्जुन को जो दिये गोविंद राधे।
2दिव्य दृष्टि मोको ना देना डरा दे॥ 139॥
3जो दृष्टि गोपियों को गोविंद राधे।
4दी थी सोई दृष्टि मोको दिला दे॥ 140॥
5नित्य विहार देखूँ गोविंद राधे।
6कृपा शक्ति द्वारा अधिकारी बना दे॥ 141॥
7अति मतवारी प्यारी गोविंद राधे।
8हंस लजाने वारी चाल दिखा दे॥ 142॥
9मुरली की तान निज गोविंद राधे।
10किसी ते कहूँगी नहिं चुपके सुना दे॥ 143॥
11गरल सुधा मधु गोविंद राधे।
12वारी प्यारी चितवनि नेकु दिखा दे॥ 144॥
13बार बार देखा तोहिं गोविंद राधे।
14फिर भी न देखा दै के आँख दिखा दे॥ 145॥
15तू तो बिनु आँख देखे गोविंद राधे।
16मोको निज आँख ते ही झाँकी दिखा दे॥ 146॥
17कहीं ते भी आना नहिं गोविंद राधे।
18उर में है बाहर झलक दिखा दे॥ 147॥
19तेरे जन खरे खरे गोविंद राधे।
20मैं हूँ एक खोटा सिक्का मोहिं चला दे॥ 148॥
21भक्त तोहिं प्राण प्रिय गोविंद राधे।
22हमसे पतित कहाँ जायें ये बता दे॥ 149॥
23खरे को दे जग साथ गोविंद राधे।
24खोटे को तेरे सिवा कोई साथ ना दे॥ 150॥