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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

दैन्य माधुरी · पृष्ठ 12

Reading 25 of 516 · Source nos. 127–138 · Source PDF 29

1प्राण कहे मैं ना रहुँ गोविंद राधे।

2आँखि कहे एक बार और दिखा दे॥ 127॥

3जो मोहिं “मेरा” माने गोविंद राधे।

4वाय अपनाऊँ यह याद करो वादे॥ 128॥

5अपना बनाना है तो गोविंद राधे।

6झूठे वादे ना करु अपना बना दे॥ 129॥

7सुना है कि तेरे घर गोविंद राधे।

8अंधेर नहिं चाहे देर लगा दे॥ 130॥

9देर लगाना अच्छा गोविंद राधे।

10देर लगा के मेरा प्रेम बढ़ा दे॥ 131॥

11एक दिन तू भी मेरा गोविंद राधे।

12होगा इस सपने को साँच बना दे॥ 132॥

13तेरा प्यार पाऊँगी मैं गोविंद राधे।

14मेरी इस आस का विश्वास बढ़ा दे॥ 133॥

15एक वर माँगूँ तो सों गोविंद राधे।

16तव सुख सुखी रहूँ ऐसी बना दे॥ 134॥

17स्वामी न चाहे कछु गोविंद राधे।

18दासी भी न चाहे कछु ऐसी बना दे॥ 135॥

19इच्छा में इच्छा रखूँ गोविंद राधे।

20मैंने व्रत लिया मेरे व्रत को निभा दे॥ 136॥

21परमानन्दकंद गोविंद राधे।

22दोउ मुख चन्द का चकोर बना दे॥ 137॥

23तू तो मोहिं देखे नित गोविंद राधे।

24मैं भी तोहिं देखूँ ऐसी दृष्टि दिला दे॥ 138॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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