Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
दैन्य माधुरी · पृष्ठ 10
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1और कछु ना दे ना दे गोविंद राधे।
2मिलन की व्याकुलता तो बढ़ा दे॥ 103॥
3दर्शन दे या ना दे गोविंद राधे।
4प्रेम सुधा सिन्धु में तो डुबा दे॥ 104॥
5प्रेम सिन्धु में डुबा दे गोविंद राधे।
6तू मेरा मैं तेरी भावना बढ़ा दे॥ 105॥
7सुना है तू जादूगर गोविंद राधे।
8ऐसा जादू कर मोहिं गोपी बना दे॥ 106॥
9भगवान जनि बनु गोविंद राधे।
10प्रियतम बनु मोहिं प्यारी बना दे॥ 107॥
11तोहिं नहिं मानूँ ब्रह्म गोविंद राधे।
12तू तो मेरा पिय मोहिं प्यारी बना दे॥ 108॥
13उर ते लगा ले प्यारे गोविंद राधे।
14सदा सदा को मोहिं प्यारी बना दे॥ 109॥
15और प्यार दे या ना दे गोविंद राधे।
16एक बार मेरी कहि सीने ते लगा दे॥ 110॥
17उर ते लगा ना हरि तो गोविंद राधे।
18दूर ते ही मेरी ओर लखि मुसका दे॥ 111॥
19वो दिन कब आये गोविंद राधे।
20जब श्याम प्यारी कहि भुज फैला दे॥ 112॥
21एक दिन आना होगा गोविंद राधे।
22तब लौं चाहे जितना तड़पा दे॥ 113॥
23एक दिन मेरा प्यार गोविंद राधे।
24देख लेना पिय तोेहूँ तड़पा दे॥ 114॥