Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
दैन्य माधुरी · पृष्ठ 8
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1तरसाने में ही सुख गोविंद राधे।
2मिले यदि जी भर के तरसा दे॥ 79॥
3गाती रहूँगी नाम गोविंद राधे।
4तू ध्यान दे चाहे हवा में उड़ा दे॥ 80॥
5अपना बनाया तोहिं गोविंद राधे।
6अब पिय पाछे पग हटे ना बता दे॥ 81॥
7प्यार करो या मारो गोविंद राधे।
8पाछा नहिं छोड़ें हम पल छिन आधे॥ 82॥
9छोडूँ न पाछा तेरा गोविंद राधे।
10चाहे अपना ले मोहिं चाहे ठुकरा दे॥ 83॥
11मेरे प्राणधन कृष्ण गोविंद राधे।
12उर ते लगा ले पुनि चक्र चला दे॥ 84॥
13मेरे थे रहोगे तुम गोविंद राधे।
14प्यार करो चाहे चक्र चला दे॥ 85॥
15मेरे थे रहोगे तुम गोविंद राधे।
16चाहे यह कहो तू कौन है बता दे॥ 86॥
17ममता बढ़ा दे मेरी गोविंद राधे।
18तुम दोनों ते ही शेष जग ते हटा दे॥ 87॥
19मेरा तो परम पति गोविंद राधे।
20परम पिता परमात्मा बता दे॥ 88॥
21मेरे तो एक ही हैं गोविंद राधे।
22साँचो यार नन्दकुमार बता दे॥ 89॥
23मेरे साँचे यार पै गोविंद राधे।
24अगनित बार बलिहार बता दे॥ 90॥