Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
दैन्य माधुरी · पृष्ठ 7
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1प्रेम निष्काम माँगूँ गोविंद राधे।
2एक बार कह तो दे दूँगा चाहे ना दे॥ 67॥
3तेरे द्वार जो भी गया गोविंद राधे।
4खाली हाथ लौटा कौन नाम बता दे॥ 68॥
5कर्मी को स्वर्ग अरु गोविंद राधे।
6ज्ञानी को मोक्ष मोहिं प्रेम सुधा दे॥ 69॥
7योगियों को सिद्धि दे दे गोविंद राधे।
8मोकूँ युगल पद सेवा दिला दे॥ 70॥
9कछु नाहिं माँगूँ क्योंकि गोविंद राधे।
10बिनु माँगे मोती मिले माँगे भीख ना दे॥ 71॥
11तेरी सब वस्तु पै गोविंद राधे।
12मेरा अधिकार है तू दे चाहे ना दे॥ 72॥
13तुझते विमुख होके गोविंद राधे।
14अति दुःख पाया हरि अब तो क्षमा दे॥ 73॥
15तुझते विमुख होके गोविंद राधे।
16हुआ निष्पाप कौन नाम बता दे॥ 74॥
17तुझते विमुख होके गोविंद राधे।
18पाप ही कमाया अब सन्मुखता दे॥ 75॥
19तेरा मेरा नाता जो गोविंद राधे।
20छत्तीस है तिरसठ तू बना दे॥ 76॥
21श्याम तू मिले ना मिले गोविंद राधे।
22मिलने की तीव्र पिपासा बढ़ा दे॥ 77॥
23दर्शन दे या ना दे गोविंद राधे।
24दर्शन देने वाली लगन लगा दे॥ 78॥