लोड हो रहा है…लोड हुँदैछ…
Skip to main content
Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

दैन्य माधुरी · पृष्ठ 3

Reading 16 of 516 · Source nos. 19–30 · Source PDF 20

1जित देखूँ दीखें गोविंद राधे।

2ऐसा जादू का डंडा घुमा दे॥ 19॥

3बार बार देखूँ तोहिं गोविंद राधे।

4बार बार दर्शन प्यास बढ़ा दे॥ 20॥

5रोम रोम रस चुये गोविंद राधे।

6आठों याम पीते तेरे जन न अघाते॥ 21 ॥

7तुम हो कृपालु दोऊ गोविंद राधे।

8कृपा कोर करि मेरी बिगरी बना दे॥ 22॥

9सत चित आनन्द गोविंद राधे।

10वृन्दाविपिनचन्द प्रेमसुधा दे॥ 23 ॥

11नन्दनन्दानन्दकन्द गोविंद राधे।

12पादारविन्द मकरन्द पिला दे॥ 24॥

13भुक्ति मुक्ति कछु ना दे गोविंद राधे।

14अष्टयामी सेवा करुँ ऐसी बना दे॥ 25 ॥

15भुक्ति मुक्ति बैकुण्ठ गोविंद राधे।

16ना दे ना दे ना दे हरि गुरु सेवा दे॥ 26॥

17सब इच्छा छोड़ दिया गोविंद राधे।

18एक इच्छा श्यामा श्याम सेवा दिला दे॥ 27 ॥

19तू है सत्य संकल्प गोविंद राधे।

20संकल्प ते ही निज सेवा दिला दे॥ 28॥

21तेरी सेवा ही तो मेरा गोविंद राधे।

22जन्म सिद्ध अधिकार मो को दिला दे॥ 29 ॥

23तन मन धन सब गोविंद राधे।

24सेवा में लगाऊँ तेरी ऐसा बना दे॥ 30॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

Source edition and PDF · Text version