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Radha Govind Geet Part 1

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जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

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1जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

2जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज का जन्म सन् 1922 ई. में शरत्पूर्णिमा की शुभ रात्रि में

3भारत के उत्तर प्रदेश प्रांत के प्रतापगढ़ जिले के मनगढ़ ग्राम में सर्वोच्च ब्राह्मण कुल में

4हुआ।

5आपकी प्रारंभिक शिक्षा मनगढ़ एवं कुन्डा में सम्पन्न हुई। पश्चात् आपने इंदौर,

6चित्रकूट एवं वाराणसी में व्याकरण, साहित्य तथा आयुर्वेद का अध्ययन किया। 16 वर्ष

7की अल्पायु में ही चित्रकूट में शरभंग आश्रम के समीपस्थ बीहड़वनों में एवं वृन्दावन

8में वंशीवट के निकट जंगलों में वास किया।

9सन् 1955 में आपने चित्रकूट में एक विराट दार्शनिक सम्मेलन का आयोजन

10किया, जिसमें काशी आदि स्थानों के अनेक विद्वान् एवं समस्त जगद्गुरु भी सम्मिलित

11हुए। सन् 1956 में ऐसा ही एक विराट संत सम्मेलन आपने कानपुर में आयोजित

12किया। आपके समस्त वेद शास्त्रों के अद्वितीय, असाधारण ज्ञान से वहाँ उपस्थित काशी

13के मूर्धन्य विद्वान् स्तम्भित रह गये। उस समय आपके संबंध में काशी के प्रख्यात

14पंडित, शास्त्रार्थ महाविद्यालय (काशी) के संस्थापक, शास्त्रार्थ महारथी, भारत के

15सर्वमान्य एवं अग्रगण्य दार्शनिक, काशी विद्वत्परिषत् के प्रधानमंत्री आचार्य श्री राज

16नारायण जी शुक्ल “षट्शास्त्री” ने सार्वजनिक रूप से जो घोषणा की थी, उसका अंश

17इस प्रकार है—(कानपुर 19-10-56)

18““काशी के पंडित आसानी से किसी को समस्त शास्त्रों का विद्वान् नहीं

19स्वीकार करते। हम लोग तो पहले शास्त्रार्थ करने के लिए ललकारते हैं। हम उसे

20हर प्रकार से कसौटी पर कसते हैं और तब उसे शास्त्रज्ञ स्वीकार करते हैं। हम

21आज इस मंच से इस विशाल विद्वन्मंडल को यह बताना चाहते हैं कि हमने

22संताग्रगण्य श्री कृपालु जी महाराज एवं उनकी भगवद्दत प्रतिभा को पहचाना है

23और हम आपको सलाह देना चाहते हैं कि आप भी इनको पहचानें और इनसे

24लाभ उठायें।

25आप लोगों के लिए यह परम सौभाग्य की बात है कि ऐसे दिव्य वांङ् मय

26को उपस्थित करने वाले एक संत आपके बीच में आये हैं। काशी समस्त

27विश्व का गुरुकुल है। हम उसी काशी के निवासी यहाँ बैठे हुए हैं। कल

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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