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Shri Radha Trayodashi

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

चातुरी पाँच गौर सरकार।

Reading 9 of 20 · Radha · Source no. 5 · Source PDF 13–14

1५.

2चातुरी पाँच गौर सरकार।

3एक चातुरी भ्रूनर्तन की, जेहि लखि पिय बलिहार।

4एक चातुरी नैन बान की, तिरछी बरछी धार।

5एक चातुरी मृदु बोलनि की, मोहति नंदकुमार।

6एक चातुरी केलि-कला की, प्रकटति रास मझार।

7एक हास-परिहास चातुरी, सखियुन संग निहार।

8कह ‘कृपालु’ धरि रूप चातुरी, सेवत भानुदुलार।

9भावार्थ: गौरांगी स्वामिनी राधा पाँच प्रकार की दक्षता से पूर्ण हैं। प्रथम

10दक्षता तो नृत्य-काल में उनके भ्रूनर्तन की है, जिसे देखकर उनके रसिक

11प्रियतम उन पर अपना सर्वस्व न्यौछावर करते हैं। दूसरी दक्षता उनके तिरछे

12कटाक्षपातों की है जो प्रियतम के हृदय को घायल करने के लिये बरछी का

13कार्य करते हैं। तीसरी दक्षता उनकी मधुर वाणी की है जिससे मुग्ध हुए

14प्रियतम के श्रवण उनके मृदु वचन सुनने को सदा आतुर रहते हैं। रास

15क्रीड़ा के मध्य चौथी दक्षता रति कला की है। सखियों के साथ उनके

16हास परिहास की दक्षता भी देखने योग्य हैं। श्री ‘कृपालु जी’ कहते हैं कि

17दक्षता साकार रूप धारण कर श्री राधा की सेवा में रत हैं।

Thirteen source-numbered Radha verses with published Hindi meanings from the supplied Hindi source. Numbering and contributor credits remain edition-specific. Supplied edition: द्वितीय संस्करण : गुरुपूर्णिमा, ११ जुलाई, २००६.

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