Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
पंचमणि मंडित भानुदुलार।
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1४.
2पंचमणि मंडित भानुदुलार।
3शरणागत पतितन हित श्यामा, चिंतामणि अनुहार।
4ब्रज की ब्रज - गोपिन हित श्यामा, चूड़ामणि बलिहार।
5श्री वृषभानु कीर्ति हित श्यामा, कुलमणि तनु साकार।
6श्याम विरह ज्वाला हित श्यामा, देह शान्तिमणिधार।
7केलि कुंज, भूषण मणि श्यामा, मंजु निकुंज मझार।
8कह ‘कृपालु’ मम उर सम्पुट मणि, महँ विहरहु सुकुमार।
9भावार्थ: भानुदुलारी श्री राधा पाँच प्रकार की मणियों से अलंकृत हैं। जो
10पतित जन उनकी शरण ग्रहण कर लेते हैं उनकी सम्पूर्ण चिन्ताओं का
11हरण करने वाली श्री राधा चिन्तामणि के समान हैं। ब्रजगोपियों की
12चूड़ामणि स्वरूपा श्री राधा सभी श्री कृष्ण कान्ताओं में मूर्धन्य हैं। पिता
13वृषभानु एवं माता कीर्ति के लिये उनकी पुत्री राधा उनकी कुलमणि का
14साकार स्वरूप हैं। प्रियतम श्यामसुन्दर की विरह ज्वाला को शान्त करने
15के लिये श्री राधा मूर्तिमती शान्ति मणि हैं। सुन्दर निकुंजों के मध्य में वे
16मधुर क्रीड़ा कुंज की मणिस्वरूपा हैं। श्री ‘कृपालु जी’ कहते हैं कि हे
17सुकुमारी राधे! मेरे हृदय-सम्पुट मणि में आप विहार करें।