Dainik Prarthana — source anthology; see printed contributor credits
आरती श्री कृष्ण (बाल रूप)
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1आरती श्री कृष्ण
2(बाल रूप)
3आरति यशुमति शिशु की कीजै।
4जय जय जय नँदनंदन की जै॥
5सुकृत कौन यशुमति अस तेरो।
6जासों ब्रह्म भयो शिशु तेरो।
7विधि हरि हरहुँ सेव्य शिशु तेरो,
8स्वामि सखा सुत पति सोइ मेरो।
9मोहिँ अपनाय कृपा अस कीजै,
10जय जय जय नँदनंदन की जै।।
11जगतपिता है यह शिशु तेरो,
12मैं भी इक जग महँ शिशु तेरो।
13भलो बुरो जैसो हूँ तेरो,
14कोउ अवलंब और नहिं मेरो।
15मोहिँ “कृपालु” अपनो करि लीजै,
16जय जय जय नँदनंदन की जै॥
17बलिहार यशुमति शिशु बलिहार।
18शिशु पर कोटिन प्रानन वार।
19शिशु आनन्दघन तन बलिहार।
20शिशु तनु चिन्मय दिव्य निहार।
21शिशु तनु नील वरन रिझवार।
22शिशु को किय यशुमति शृंगार।
23शिशु लखि कोटि काम दउँ वार।
24शिशु लखि विधि हरि हर बलिहार।
25शिशु अस्तुति कर वेदहुँ चार।
26शिशु तनु चुवत प्रेम रस धार।
27शिशु हित आशिष दें ब्रजनार।
28शिशु चिरजीवें कह ब्रजनार।
29शिशु लखि जोइ सुधि देय बिसार।
30शिशु हित देति सखिन उपहार।
31शिशु जयकार करें ब्रजनार।
32भाल “कृपालु” दिठौना डार॥