Dainik Prarthana — source anthology; see printed contributor credits
आरती भानुदुलारी (बाल रूप)
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1आरती भानुदुलारी
2(बाल रूप)
3आरति कीर्ति कुँवरि की कीजै,
4जय जय भानुनंदिनि की जै।
5कौन सुकृति अस कीरति तेरी,
6सुता योगमाया भइ तेरी।
7तेरी सुता स्वामिनी मेरी,
8अगनित उमा रमा हैं चेरी।
9मोहूँ निज सहचरि करि लीजै,
10जय जय भानुनंदिनि की जै।।
11जग जननी है लाली तेरी,
12जग पालन कर लाली तेरी।
13लाल स्वामिनी लाली तेरी,
14सोइ लाली गति मति रति मेरी।
15मोहिं “कृपालु” टुक ब्रजरस दीजै,
16जय जय भानुनंदिनि की जै।।
17कीर्ति घर प्रकटीं कीर्तिकुमार।
18विधि हरि हर कर जय जय कार।
19करति स्वस्तिवाचन श्रुति चार।
20ब्रह्मादिक आरती उतार।
21नारद शारद कह बलिहार।
22नेति नेति जेहि वेद पुकार।
23सोइ बनि आईं भानुदुलार।
24चिन्मय दिव्य गौर तनु धार।
25छवि पर कोटि काम दउँ वार।
26कुँवरि कृपा मूरति साकार।
27दीनन आदर येहि दरबार।
28करहु “कृपालु” कृपा सरकार।