Dainik Prarthana — source anthology; see printed contributor credits
श्री भानुदुलारी की आरती
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1श्री भानुदुलारी की आरती
2आरती भानुदुलारी की, कि श्री बरसाने वारी की।
3बिराजैं सिंहासन श्यामा,
4दिव्य श्री वृन्दावन धामा,
5ढुरावैं चँवर सुघर बामा,
6पलोटैं पग पूरनकामा,
7लली पग अंक, चापि निःशंक, श्याम जनु रंक,
8पाइ निधि पारस प्यारी की ॥ 1॥
9गौर सिर कनक मुकुट राजै,
10चन्द्रिका चारु सुछवि छाजै,
11कुटिल कुन्तल अलि भल भ्राजै,
12लखत जेहि शिखि कलाप लाजै,
13माँग सिन्दूर, मोतियन पूर, सजीवन मूर,
14ब्रह्म गोवर्धनधारी की ॥ 2॥
15श्रवण बिच करणफूल झलकै,
16नासिका बिच बेसर हलकै,
17नयन बिच प्रेम सुधा छलकै,
18बन्धु बल के लखि लखि ललकै,
19चपल नथ-चमक, दसन-दुति-दमक, सुमुखि-मुख-रमक
20मधुर मुसुकनि सुकुमारी की ॥ 3 ॥
21मोतियन लर उर मणि माला,
22चिबुक झलकत इक तिल काला,
23शम्भु शुक दैं सँग कर ताला,
24लली गुन गावति ब्रजबाला,
25कबहुँ मुख मुरनि, कबहुँ दृग दुरनि, कबहुँ दृग जुरनि
26कबहुँ सुधि भुरनि बिहारी की ॥ 4॥
27किनारिन जरिन नील सारी,
28कंचुकी कुमकुम रँग वारी,
29चुरी कर कंकन मनहारी,
30छीन कटि किंकिनि छवि न्यारी,
31पायलनि पगनि, मिहावरि लगनि, बीछुवनि नगनि,
32“कृपालु” सुकीर्ति-कुमारी की ॥ 5॥