Tulsidas (as printed in this anthology; तुलसीदास/तुलसी, PDF32)
श्रीरामचन्द्र की आरती
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1श्रीरामचन्द्र की आरती
2श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम्।
3नवकंजलोचन, कंजमुख कर कंज पद कंजारुणम् ।
4कंदर्प अगणित अमित छवि, नवनील-नीरद सुंदरम्।
5पट पीत मानहु तड़ित रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरम्।
6भजु दीनबंधु दिनेश, दानव-दैत्यवंश-निकंदनम्।
7रघुनंद आनँद कंद, कौशल चंद दशरथ-नंदनम्।
8सिर मुकुट कुंडल तिलक, चारु उदारु अंग विभूषणम्।
9आजानु भुज शरचापधर, संग्राम जित खरदूषणम्।
10इति वदति तुलसीदास, शंकर-शेष-मुनि-मन-रंजनम्।
11मम हृदय-कंज निवास कुरु, कामादि खलदल-गंजनम्।
12मनु जाहि रांच्यो मिलइ सो वर सहज सुंदर साँवरो।
13करुना निधान सुजान, सीलु सनेहु जानत रावरो।
14एहि भाँति गौरि असीस, सुनि सिय सहित हिय हरषीं अली।
15तुलसी भवानिहिं पूजि, पुनि पुनि मुदित मन मंदिर चलीं।
16सो- जानि गौरि अनुकूल, सिय हिय हरषु न जाइ कहि।
17मंजुल मंगल मूल बाम, अंग फरकन लगे।