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Dainik Prarthana

Dainik Prarthana — source anthology; see printed contributor credits

भगवती माँ की आरती

Reading 9 of 21 · Source PDF 10–11

1भगवती माँ की आरती

2आरति भगवति माँ की कीजै,

3जय जय जननि जगद्गुरु की जै।

4सुकृत कौन अस वेद बतायो,

5जासों लाल कृपालुहिं पायो।

6बनि जननी निज गोद खिलायो,

7सब विधि हलरायो दुलरायो।

8मोहिं निज सुत सेवा वर दीजै,

9जय जय जननि जगद्गुरु की जै।

10तेरो सुत मानत सब तेरो,

11माँ इक काम करा दे मेरो ।

12मोहिं सो ले बनाय निज चेरो,

13रहिहौं ऋणी तोर बहुतेरो।

14माँ हौं हूँ तव सुत सुन लीजै,

15जय जय जननि जगद्गुरु की जै ।

16अर्थ - साधक समुदाय! सभी श्रद्धा पूर्वक माँ भगवती जी की

17आरती करो जो कि जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज की जन्मदात्री

18माता हैं। माँ! तुम्हारी सदा जय जयकार हो।

19माँ! तुमने ऐसे कौन से वेद विदित शुभ कर्म किये थे, जिनके

20परिणाम स्वरूप जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज को सुपुत्र रूप

21में प्राप्त किया और आपको माँ बनकर इनकी सभी बाल सुलभ

22चेष्टाओं का आनन्द प्राप्त करते हुए लालन पालन करने का

23सौभाग्य प्राप्त हुआ।

24हे जगज्जननी माँ! मुझे भी कृपा करके अपने इन अलौकिक सुत

25की सेवा का वरदान दीजिये।

26हे माँ! तुम्हारे ये पुत्र तुम्हारी प्रत्येक आज्ञा का पालन करते हैं।

27अतः हे माँ! मेरी भी एक प्रार्थना इन तक पहुँचा दीजिये कि मुझे

28अपना दास स्वीकार कर लें। हे माँ! मैं तुम्हारा हृदय से अत्यन्त

29आभारी रहूँगा।

30हे माँ! मैं भी तो तुम्हारा पुत्र हूँ, अतः कृपा करके मेरी भी यह

31प्रार्थना स्वीकार कर लीजिये।

32जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज की माता भगवती की सदा जय

33जयकार हो।

Hindi and Sanskrit daily-prayer anthology, transcribed in its printed section order. It includes scriptural passages and selections by other saints; the title-page credit does not establish sole authorship of every passage. No separate English edition is inferred. Supplied edition: द्वितीय संस्करण : मई 2010. Publisher: राधा गोविन्द समिति.

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