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Dainik Prarthana

Dainik Prarthana — source anthology; see printed contributor credits

श्री राधाकृष्णाभ्यां नमः

Reading 8 of 21 · Source PDF 9–10

1प्रार्थना

2श्री राधाकृष्णाभ्यां नमः

3श्री गुरवे नमः श्री गुरवे नमः श्री गुरवे नमः

4आचार्यं मां विजानीयान्नावमन्येत कर्हिचित्।

5न मर्त्यबुद्ध्याऽसूयेत सर्वदेवमयो गुरुः।।

6हे परम प्रियतम पूर्णतम पुरुषोत्तम श्री कृष्ण! तुम से विमुख

7होने के कारण अनादिकाल से हमने अनन्तानन्त दुःख पाये एवं

8पा रहे हैं। पाप करते करते अन्तःकरण इतना मलिन हो चुका है

9कि रसिकों द्वारा यह जानने पर भी कि तुम अपनी भुजाओं को

10पसारे अपनी वात्सल्यमयी-दृष्टि से हमारी प्रतीक्षा कर रहे हो,

11तुम्हारी शरण में नहीं आ पाता।

12हे अशरण शरण! तुम्हारी कृपा के बिना तुम्हें कोई जान भी तो

13नहीं सकता। ऐसी स्थिति में, हे अकारण करुण! पतितपावन

14श्रीकृष्ण! तुम अपनी अहैतुकी कृपा से ही हमको अपना लो।

15हे करुणा सागर! हम भुक्ति-मुक्ति आदि कुछ नहीं माँगते, हमें

16तो केवल तुम्हारे निष्काम प्रेम की ही एकमात्र चाह है।

17हे नाथ! अपने विरद की ओर देखकर इस अधम को निराश न

18करो।

19हे जीवनधन! अब बहुत हो चुका, अब तो तुम्हारे प्रेम के बिना

20यह जीवन मृत्यु से भी अधिक भयानक है। अतएव

21प्रेम भिक्षां देहि, प्रेम भिक्षां देहि, प्रेम भिक्षां देहि।

22साकेत बिहारी श्री राघवेन्द्र सरकार की जय।

23वृन्दावन बिहारी श्री यादवेन्द्र सरकार की जय।

24श्रीमद्सद्गुरु सरकार की जय।

25जय जय श्रीराधे जय जय श्रीराधे जय जय श्रीराधे।

Hindi and Sanskrit daily-prayer anthology, transcribed in its printed section order. It includes scriptural passages and selections by other saints; the title-page credit does not establish sole authorship of every passage. No separate English edition is inferred. Supplied edition: द्वितीय संस्करण : मई 2010. Publisher: राधा गोविन्द समिति.

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