लोड हो रहा है…लोड हुँदैछ…
Skip to main content
Yugal Shatak

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

ऐसी हैं मम श्यामा, श्यामा मेरी श्यामा।

Reading 94 of 112 · Source no. 82 · Source PDF 174–176

1ऐसी हैं मम श्यामा, श्यामा मेरी श्यामा।

2जैसी नहिं कहुँ भई न बामा,

3ह्वैहैं नहिं सम श्यामा, श्यामा मेरी श्यामा।

4जैसी रूप माधुरी श्यामा,

5तैसी नहिं कोउ बामा, श्यामा मेरी श्यामा।

6सुंदरि रत्न जगत रति बामा,

7सोउ मोहीं लखि श्यामा, श्यामा मेरी श्यामा।

8उमा रमा ब्रह्माणी बामा,

9मोहीं तोहिं लखि श्यामा, श्यामा मेरी श्यामा।

10ब्रज महँ जेतिक सुंदरि बामा,

11सब मोही लखि श्यामा, श्यामा मेरी श्यामा।

12मोहे मोहनहूँ लखि श्यामा,

13जेहि कह पूरन कामा, श्यामा मेरी श्यामा।

14ब्रज रस चुये रोम प्रति श्यामा,

15पिये श्याम सँग बामा, श्यामा मेरी श्यामा।

16गौरी हूँ ते गोरी श्यामा,

17तेहि सम नहिं कोउ बामा, श्यामा मेरी श्यामा।

18नारदादि मुनि लखि छवि श्यामा,

19भये मुर्छित ब्रज धामा, श्यामा मेरी श्यामा।

20लखिहौं हौं “कृपालु” छवि श्यामा,

21कबहुँ कृपा ब्रज बामा, श्यामा मेरी श्यामा॥

22भावार्थ—मेरी श्री राधा के समान अभी तक कोई स्त्री न हुई

23है, न होगी। श्रीराधा के समान रूपवती अन्य कोई नारी नहीं।

24संसार में कामदेव की पत्नी रति ही सुन्दर स्त्रियों में श्रेष्ठ मानी

25जाती है, वह भी श्रीराधा को देखकर मोहित हो गई। पार्वती, लक्ष्मी

26एवं सावित्री भी श्रीराधा के रूप को देखकर मोहित हो गई। पूर्णकाम

27श्रीकृष्ण भी श्रीराधा को देखकर मोहित हो गये। श्रीराधा के दिव्य

28अंगों से निरन्तर ब्रजरस की वर्षा होती रहती है। श्यामसुन्दर एवं

29ब्रजगोपियाँ उस रस का पान करते हैं। श्रीराधा का गौरवर्ण गौरी से

30भी उज्ज्वल है। उनकी समानता करने वाली अन्य कोई स्त्री नहीं।

31नारद जब ब्रज में आये तो राधा के सौन्दर्य को देखकर मूर्च्छित हो

32गये। “श्री कृपालुजी” कहते हैं कि मैं भी कभी किसी ब्रजगोपी की

33कृपा से श्रीराधा की मनोहारिणी छवि का दर्शन करूँगा।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Shatak scan remains a separate source. Supplied edition: Third edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

Source edition and PDF · Text version