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Yugal Shatak

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

अस मनमोहिनि राधे, राधे राधे राधे।

Reading 92 of 112 · Source no. 80 · Source PDF 172–173

1अस मनमोहिनि राधे, राधे राधे राधे।

2जो सब जग मन मोहन राधे,

3मदन कहत तेहिँ राधे, राधे राधे राधे।

4तिन मदनहुँ मोहे जिन राधे,

5तिन कह मोहन राधे, राधे राधे राधे।

6तिनहुँन मोहिं लिये तुम राधे,

7धनि धनि मोहिनि राधे, राधे राधे राधे।

8रहि न सकत पिय तुम बिनु राधे,

9इक पल कहँ कहुँ राधे, राधे राधे राधे।

10खोजत कुंज कुंज तोहिँ राधे,

11कहि “हा राधे” राधे, राधे राधे राधे।

12पद गहि सखिन कहत पिय राधे,

13मोहिं मिला दे राधे, राधे राधे राधे।

14परखत नित रह तित जित राधे,

15चलन चहति तू राधे, राधे राधे राधे।

16गावत मुरलिहिं तव गुन राधे,

17मन ते सुमिरत राधे, राधे राधे राधे।

18माँगत नित “कृपालु” पिय राधे,

19कृपा कोर तव राधे, राधे राधे राधे॥

20भावार्थ—मेरी राधा ऐसी मनमोहिनी हैं, जो सम्पूर्ण विश्व के

21मन को मोहित कर लेता है, उसे कामदेव कहते हैं उस कामदेव

22को भी जिसने मोहित किया वह श्रीकृष्ण हैं। जिस राधा ने उन

23श्रीकृष्ण को भी मोहित कर लिया वे धन्य हैं।

24हे राधे! प्रियतम कृष्ण तुम्हारे बिना एक क्षण के लिये भी किसी

25स्थान पर नहीं ठहरते। नेत्रों से ओझल होते ही वे प्रत्येक कुंज में “हा

26राधे!” कहकर तुम्हारी खोज करते हैं। सखियों के चरण पकड़कर वे

27उनसे अनुनय करते हैं कि मुझे राधा का दर्शन करा दो। जिधर भी तुम

28चलना चाहती हो उसी दिशा को देखते रहते हैं। मुरली में तुम्हारा गुणगान

29करते हैं एवं मन से तुम्हारा ही स्मरण करते हैं। श्री कृपालुजी कहते

30हैं- हे राधे! प्रियतम निरन्तर तुम्हारी कृपा-कोर की प्रतीक्षा करते रहते

31हैं।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Shatak scan remains a separate source. Supplied edition: Third edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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