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Yugal Shatak

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

भजु मन राधा राधा राधा, राधा राधा राधा।

Reading 65 of 112 · Source no. 53 · Source PDF 117–119

1भजु मन राधा राधा राधा, राधा राधा राधा।

2रसना नित रस पिवु बिनु बाधा,

3नाम सुधा रस राधा, राधा राधा राधा।

4श्रवन सुनहु नित लीला राधा,

5अगनित गुन गन राधा, राधा राधा राधा।

6त्वचा सुमिरु नित चरनन राधा,

7जेहि हरिहूँ अवराधा, राधा राधा राधा।

8नैनन ध्यान नित्य छवि राधा,

9लखहु जितै तित राधा, राधा राधा राधा।

10नासा ध्यान करहु नित राधा,

11दिव्य गंध तनु राधा, राधा राधा राधा।

12मन धरु ध्यान रैन दिन राधा,

13जेहि छवि सम छवि राधा राधा राधा राधा।

14बुधि प्रतीति दृढ़ इक दिन राधा,

15अपनैहैं मोहिं राधा, राधा राधा राधा।

16प्रेम अकाम रहे नित राधा,

17सुख मानहु सुख राधा, राधा राधा राधा।

18चहहु “कृपालु” कृपा जो राधा,

19कृष्णहुँ भजु सँग राधा, राधा राधा राधा।

20भावार्थ—अरे मेरे मन! निरन्तर श्रीराधा का ही सेवन कर।

21जिह्वा से अनवरत राधा नामामृत का पान कर। नाम-स्मरण करने

22में भला क्या विघ्न उपस्थित हो सकता है? श्रीराधा अनन्त दिव्य

23गुण-गणों से विभूषित हैं; अतः कानों से निरन्तर उनकी लीला का

24श्रवण कर उनके गुणानुवाद सुन। कोमल स्पर्श की कामना जब

25उत्पन्न हो तो श्रीराधा के कमलोपम चरणों का स्मरण कर। श्रीकृष्ण

26भी इन चरणों की आराधना करते हैं। नेत्रों से पल-पल श्रीराधा की

27दिव्य मूर्ति का ध्यान कर दसों दिशाओं में उनका ही दर्शन कर।

28नासिका से श्रीराधा के दिव्य-वपु के सुवास को ग्रहण कर। हे मेरे

29चंचल मन! तू श्री राधा के निरुपम सौन्दर्य का ही चिन्तन कर।

30श्रीराधा के समान तो श्रीराधा ही हैं। बुद्धि में ऐसी दृढ़ता रहे कि

31एक दिन मैं अवश्य ही उनकी कृपा को प्राप्त करूँगा।

32श्रीराधा के प्रति जो प्रीति हो, उसमें अपने स्वार्थ की गंध न

33हो। श्रीराधा के हितार्थ ही, उनके सुख में सुख मानते हुए उनके

34प्रति निष्काम प्रेम की भावना स्थिर करनी है। श्री कृपालुजी कहते

35हैं- यदि श्री राधा की कृपा प्राप्त करनी है तो उनके प्रियतम कृष्ण

36की भी भक्ति करनी होगी।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Shatak scan remains a separate source. Supplied edition: Third edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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