Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
छुवो जनि गोरा तनु मोरा, मोरा मोरा मोरा।
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1छुवो जनि गोरा तनु मोरा, मोरा मोरा मोरा।
2अति बदनाम नाम है तोरा,
3नाम बड़ो है मोरा, मोरा मोरा मोरा।
4अति कारो कारो तनु तोरा,
5अति गोरा तनु मोरा, मोरा मोरा मोरा।
6भयो ब्याहु नहिं अब लौं तोरा,
7भयो ब्याहु नहिं मोरा, मोरा मोरा मोरा।
8कहि हैं सब ब्रज वासी तोरा,
9नात अवशि है मोरा, मोरा मोरा मोरा।
10कछू नाहिं बिगरेगो तोरा,
11ब्याहु न कर कोउ मोरा, मोरा मोरा मोरा।
12द्वै मैया द्वै बाबा तोरा,
13निष्कलंक कुल मोरा, मोरा मोरा मोरा।
14चोरी करन व्यसन है तोरा,
15हो अपयश बड़ मोरा, मोरा मोरा मोरा।
16जार शिखामणि पद है तोरा,
17हौं चह पति रह मोरा, मोरा मोरा मोरा।
18मदिरा प्रेम मत्त मन तोरा,
19अति भोरा मन मोरा, मोरा मोरा मोरा।
20जानति कारो करतब तोरा,
21सखिन जूह सब मोरा, मोरा मोरा मोरा।
22प्यार दूर ही ते चह तोरा,
23यह “कृपालु” मन मोरा, मोरा मोरा मोरा॥
24भावार्थ—किसी गोपी ने श्रीकृष्ण से कहा—हे श्यामसुन्दर!
25मुझे मत छूना। मेरा रंग गोरा है और तुम काले हो। सम्पूर्ण ब्रज में
26तुम्हारी बदनामी है। मेरे माता पिता का नाम बड़ा है। तुम्हारा अभी
27तक विवाह नहीं हुआ है, मेरा भी विवाह नहीं हुआ है। इस प्रकार
28से यदि ब्रज में किसी ने मुझे तुम्हारे साथ देख लिया तो मेरी बदनामी
29होगी। तुम्हारा तो कुछ नहीं बिगड़ेगा परन्तु मेरा विवाह होना कठिन
30हो जायगा। तुम्हारे तो दो पिता एवं दो माताएँ हैं परन्तु मेरा कुल तो
31पवित्र है। तुम तो चोरी करने में बड़े प्रवीण हो परन्तु तुम्हारे साथ
32रहने से मेरी तो निंदा होगी। मैं तो ऐसे पति की कामना करती हूँ
33जो केवल मुझसे ही प्रेम करे किंतु तुम तो सभी ब्रज-गोपियों से
34प्रेम करते हो। तुम्हारा मन प्रेम-रस-मदिरा से उन्मत्त रहता है-मैं
35अत्यन्त भोली-भाली हूँ। मेरी सखियाँ तुम्हारी चोरी, जारी की
36सारी करतूतें जानती हैं। श्री कृपालुजी कहते हैं- मेरा मन तो तुम्हारे
37साथ दूर से ही प्रेम करना चाहता है।