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Yugal Ras

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प्रवचन माधुरी

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1प्रवचन माधुरी

2पिछले 50-60 वर्षों से जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज जीव कल्याणार्थ

3अथक प्रयास कर रहे हैं। प्रवचन के माध्यम से, संकीर्तन के माध्यम से तथा

4अन्य साधनों द्बारा स्वयं कष्ट सहकर भी जीवों को श्रीकृष्ण प्राप्ति की ओर

5अग्रसर करने के लिये तथा वैदिक सिद्धांतों को सर्वसाधारण तक पहुंँचाने के

6लिये अहर्निश भगीरथ प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र,

7हरिजन, अंग्रेज सभी जाति और सभी सम्प्रदाय के प्रचारक बनाये हैं जो विश्व

8के कोने-कोने में उनके वैदिक सिद्धांतों का प्रचार कर रहे हैं। यद्यपि उनके

9प्रवचनों का संकलन पिछले 25 वर्षों से ही हो पाया है,लेकिन जो निधि अभी

10उपलब्ध है, वह भी अगाध अपरिमेय समुद्रवत ही है, सब कुछ प्रकाशित

11करना तो असम्भव ही है। साधकों के प्रेमाग्रह पर यह प्रवचन माधुरी नाम से

12पुस्तकों की एक शृंखला प्रारम्भ की गई है। इसमें श्री महाराज जी द्वारा दिये

13गये प्रवचन एक-एक करके प्रकाशित किय जायेंगे। अभी तक पाँच पुस्तकें

14प्रकाशित हुई हैं।

15प्रवचन माधुरी प्रवचन माधुरी प्रवचन माधुरी

16भाग-१ भाग-२ भाग-३

17प्रवचन माधुरी प्रवचन माधुरी

18भाग-४ भाग-५

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Ras scan is a separate source, not the scan transcribed here. Supplied edition: Fourth edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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