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Yugal Ras

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

भोरी भारी प्यारी प्यारी प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

Reading 90 of 119 · Source no. 79 · Source PDF 161–163

1भोरी भारी प्यारी प्यारी प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

2श्री वृषभानु दुलारी प्यारी,

3वारी रति लखि प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

4श्री बरसाने वारी प्यारी,

5वारी छवि लखि प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

6चूनरि बेसर वारी प्यारी,

7वारी पिय लखि प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

8नख सिख किय सिँगार भल प्यारी,

9नथ मोतिन लर प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

10नील बसन कंचुकि छवि प्यारी,

11गर लर मुक्तन प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

12कर कंकन चूरिन धुनि प्यारी,

13पग बिछुवनि छवि प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

14बैठीं मंजु निकुंजनि प्यारी,

15पिय चापैं पग प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

16अष्ट सखिन सँग जब चल प्यारी,

17पिय कह “जय हो प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

18बलिहारी “कृपालु” मम प्यारी,

19प्यारी सम हैं प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी॥

20भावार्थ— प्यारी वृषभानु दुलारी अत्यन्त ही भोली

21भाली हैं। श्री बरसाने वाली राधा की छवि देखकर रति बलिहार

22जाती है। शीश पर चूनरि एवं नाक में बेसर धारण करने वाली

23राधा की प्यारी छवि देखकर स्वयं छवि भी स्वयं को निछावर

24करती हैं। नख शिख से सोलह शृंगार धारण किये हुए श्री राधा

25को देखकर श्री कृष्ण भी बलिहार जाते हैं। श्री राधा की नासिका

26में मोतियों की लड़युक्त नथ सुशोभित है। नीले रंग का अधोवस्त्र

27है। वक्षःस्थल पर कंचुकी शोभा पा रही है। हाथों में कंकण

28शोभा पा रहे हैं। हाथों में कंकण एवं चूड़ियों की खनखनाहट

29है। चरणों में बिछुए धारण किये हैं जो अत्यन्त सुन्दर प्रतीत

30होते हैं। श्री राधा सुन्दर निकुंज के मध्य विराजमान हैं। प्रियतम

31कृष्ण उनके चरण दबा रहे हैं। ललिता, विशाखा आदि अष्ट

32सखियों सहित जब श्री राधा कहीं जाती हैं, तब प्रियतम उनकी

33जय जयकार करते हैं।“कृपालु”कहते हैं- मेरी प्यारी राधा के

34समान तो एकमात्र राधा ही हैं। मैं उन पर बलिहार जाता हूँ।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Ras scan is a separate source, not the scan transcribed here. Supplied edition: Fourth edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

Source edition and PDF · Text version