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Yugal Ras

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

मेरी बरसाने वारी प्यारी, प्यारी मेरी प्यारी।

Reading 88 of 119 · Source no. 77 · Source PDF 158–159

1मेरी बरसाने वारी प्यारी, प्यारी मेरी प्यारी।

2जा पर वारी सब ब्रजनारी,

3पिय वारी लखि प्यारी, प्यारी मेरी प्यारी।

4मदन विमोहन हैं बनवारी,

5उनहुँन मोहिनि प्यारी, प्यारी मेरी प्यारी।

6भूरि भाग्य मानत बनवारी,

7पाय चरण रज प्यारी, प्यारी मेरी प्यारी।

8मुरलिहिँ गावत नित बनवारी,

9अगनित गुन गन प्यारी, प्यारी मेरी प्यारी।

10मानिनि मान जानि बनवारी,

11रोवत धरि पग प्यारी, प्यारी मेरी प्यारी।

12लखत रहत नित प्रति बनवारी,

13प्यारी छवि अति प्यारी, प्यारी मेरी प्यारी।

14सेवा माँगत नित बनवारी,

15चापन हित पग प्यारी, प्यारी मेरी प्यारी।

16करहु “कृपालु” कृपा सुकुमारी,

17मोहूँ पर अब प्यारी, प्यारी मेरी प्यारी।

18भावार्थ—मेरी बरसाने में वास करने वाली राधा की

19छवि देखकर सभी ब्रज गोपियाँ स्वयं को निछावर करती हैं।

20प्रियतम कृष्ण श्री राधा को निहारते ही रहते हैं। उन पर बलिहार

21जाते हैं। श्री कृष्ण तो कामदेव को मोहित करने वाले हैं परन्तु

22श्री राधा तो उन मदन-मोहन को भी मोह लेती हैं। जब श्री

23कृष्ण को भाग्य से कभी श्री राधा चरणतल से स्पर्श की हुई रज

24प्राप्त होती है तो वे स्वयं को कृतार्थ मानते हैं। मुरली में निरन्तर

25श्री राधा के अनन्त गुणों का गान किया करते हैं। जब मानिनी

26राधा प्रियतम से मान करती हैं तब प्रिया के चरणों में सिर

27रखकर रो रोकर उन्हें मनाते हैं। श्री राधा की मनमोहक छवि

28का सदा ही अपलक नेत्रों से पान करते रहते हैं। निज करों से

29श्री राधा के कोमल चरणों को दबाने की सेवा प्राप्त करने के

30लिये तो सखियों से सदा अनुनय विनय करते रहते हैं।“कृपालु”

31कहते हैं- हे सुकुमारी राधे! अब तो मुझ पर भी अपनी कृपा

32करो।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Ras scan is a separate source, not the scan transcribed here. Supplied edition: Fourth edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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