लोड हो रहा है…लोड हुँदैछ…
Skip to main content
Yugal Ras

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

करु सुमिरन मन राधे, राधे राधे राधे।

Reading 78 of 119 · Source no. 67 · Source PDF 142–144

1करु सुमिरन मन राधे, राधे राधे राधे।

2इन्द्रिन भजन न मानतिं राधे,

3भजन मान मन राधे, राधे राधे राधे।

4गावु नाम लीला गुन राधे,

5किन्तु ध्यान करु राधे, राधे राधे राधे।

6करहु कर्म केवल हित राधे,

7जेहि प्रसन्न हों राधे, राधे राधे राधे।

8गहहु ज्ञान यह को हैं राधे,

9हैं हमारि को राधे, राधे राधे राधे।

10योग इहै, कब मिलिहैं राधे,

11सोचु मनहिं मन राधे, राधे राधे राधे।

12जो कछु करु सब करु हित राधे,

13बिसरहु जनि पल आधे, राधे राधे राधे।

14भुक्ति मुक्ति जनि चहु ढिग राधे,

15चहहु प्रेमरस राधे, राधे राधे राधे।

16बैकुण्ठहुँ सुख जनि चहु राधे,

17तहँ नहिं ब्रजरस राधे, राधे राधे राधे।

18चहहु “कृपालु” सदा सुख राधे,

19राखहु रुचि रुचि राधे, राधे राधे राधे॥

20भावार्थ—हे मेरे मन! तू श्री राधा का स्मरण कर।

21इन्द्रियों की क्रिया (बिना मन के अनुराग के पूजा, वन्दन आदि)

22का विशेष महत्व नहीं है। ईश्वर के यहाँ मन के स्मरण का ही

23महत्व है।““मन एव मनुष्याणां कारणं बंध मोक्षयोः।””रसना से

24श्री राधा के नाम, लीला गुणादि का गायन करो किन्तु मन से

25श्री राधा के अलौकिक रूप का ध्यान करना परमावश्यक है।

26शरीर से वही कर्म करो जिससे श्री राधा प्रसन्न हों।““तत्कर्म

27हरितोषं यत्।””श्री राधा कौन हैं? इस तत्व का ज्ञान प्राप्त करो।

28श्री राधा से हमारा क्या सम्बंध है? इसे जानो। मन ही मन इस

29प्रकार का चिंतन करना कि श्री राधा मुझे कब मिलेंगी? यही

30योग है। एक क्षण का भी विस्मरण न होने पावे। शरीर की

31प्रत्येक क्रिया भी श्री राधा के हेतु ही हो। श्री राधा से कभी

32ब्रह्मलोकपर्यन्त के भोग एवं पाँच प्रकार की मुक्तियाँ न माँगो।

33एकमात्र प्रेमभिक्षा ही माँगो। जिस वैकुण्ठ में ब्रज-रस का अभाव

34है, वह वैकुंठ भी श्री राधा से न माँगो। भक्त की प्रत्येक कामना

35श्री राधा के सुख के लिये ही हो। प्रेमी-जनों को तो सदैव श्री

36राधा की रुचि में ही रुचि रखनी है।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Ras scan is a separate source, not the scan transcribed here. Supplied edition: Fourth edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

Source edition and PDF · Text version