Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
तू अति भोरी मैया, मैया मेरी मैया।
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1तू अति भोरी मैया, मैया मेरी मैया।
2गोदिहिं बैठि कहत सुनु मैया,
3बात बनाय कन्हैया, मैया मेरी मैया।
4यह गूजरि भरि गागरि मैया,
5जाति रही मग मैया, मैया मेरी मैया।
6लखति रही इत उत चहुँ मैया,
7फिसलि गयो पग मैया, मैया मेरी मैया।
8गिरी अवनि यह गूजरि मैया,
9फूटी गागरि मैया, मैया मेरी मैया।
10हँसी आइ गइ मो कहँ मैया,
11तब खिसियाई मैया, मैया मेरी मैया।
12चलन लगी जब आगे मैया,
13आयो बड़ कपि मैया, मैया मेरी मैया।
14वाने फारी चूनरि मैया,
15आय हँसी मोय मैया, मैया मेरी मैया।
16झूठहिं दोष लगाय मैया,
17तव लाला पर मैया, मैया मेरी मैया।
18झूठ सफेद बोल याय मैया,
19नरकहुँ डर नहिं मैया, मैया मेरी मैया।
20है अवतार झूठ की मैया,
21कह “कृपालु” यह मैया, मैया मेरी मैया॥
22भावार्थ—बाल कृष्ण माता यशोदा की गोद में बैठे
23थे। कन्हैया मैया से बातें बनाने लगे- अरी मैया! तुम तो भोली
24भाली हो। जो ग्वालिनी मेरी शिकायत लेकर आयी है, उसकी
25सच्ची कथा मैं सुनाता हूँ। एक दिन यह अपना घड़ा भरकर
26गली से जा रही थी। यह चारों ओर दृष्टि डालते हुए चल रही
27थी, अतः इसका पैर फिसल गया। यह पृथ्वी पर गिर पड़ी।
28सिर का घड़ा फूट गया। उस दृश्य को देखकर मुझे हँसी आ
29गई। तब यह खिसिया गई। जब यह पुनः खड़ी होकर चलने
30लगी तब एक बड़ा सा वानर वहाँ आ गया। उस वानर ने
31इसकी चूनरि फाड़ दी, तब मुझे फिर से हँसी आ गई। यह
32ग्वालिनी तुम्हारे पुत्र पर व्यर्थ ही आरोप लगा रही है। यह तो
33झूठ बोलने में तनिक भी संकोच नहीं करती। इसे नरक का भी
34भय नहीं।“कृपालु”के शब्दों में कन्हैया अपनी मैया से कहते
35हैं कि यह तो साक्षात् झूठ का अवतार है।