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Yugal Ras

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

अति ह्वै गई अब मैया, मैया मैया मैया।

Reading 56 of 119 · Source no. 45 · Source PDF 100–102

1अति ह्वै गई अब मैया, मैया मैया मैया।

2लेहु आपुनो गोकुल मैया,

3अंत बसें हम मैया, मैया मैया मैया।

4ढायो जुलुम सखिन पर मैया,

5यह छैया तव मैया, मैया मैया मैया।

6जाँय यमुन तट जब हम मैया,

7यह आवे नित मैया, मैया मैया मैया।

8सँग रह सखन करोरन मैया,

9लै लठिया कर मैया, मैया मैया मैया।

10फोरत घट सखियन झट मैया,

11भाजत हँसि हँसि मैया, मैया मैया मैया।

12तोरत सखि मोतिन लर मैया

13कह जा कहि दे मैया, मैया मैया मैया।

14पुनि कह मोरी जोरी मैया,

15कर बरजोरी मैया, मैया मैया मैया।

16तूने कियो लाड़ अति मैया,

17याही को फल मैया, मैया मैया मैया।

18यह जितनोइ छोटो है मैया,

19उतनोइ खोटो मैया, मैया मैया मैया।

20नेकु सोचु तू निज मन मैया,

21भलो लाल को मैया, मैया मैया मैया।

22जब यह बड़ो होय तब मैया,

23गजब करेगो मैया, मैया मैया मैया।

24दधि को दान माँग मग मैया,

25कह हौँ राजा मैया, मैया मैया मैया।

26जो “कृपालु” नहिं दउँ तो मैया,

27फोरे मटुकिहुँ मैया, मैया मैया मैया॥

28भावार्थ—ब्रजगोपियाँ यशोदा को उलाहना देते हुए

29कहती हैं- हे यशोदे! अब तो अति हो गई। तुम अपना गोकुल

30सम्भालो हम तो कहीं अन्यत्र ही निवास करेंगी। तुम्हारे पुत्र

31कृष्ण ने ब्रज-गोपियों की नाकों में दम कर दी है। कहाँ तक

32कहें-जब हम सखियाँ यमुना-तट पर जल भरने जाती हैं तब

33यह नित्य ही वहाँ पहुँच जाता है। यह अकेला ही नहीं आता,

34करोड़ों ग्वाल बाल इसके साथ अपने हाथों में लठिया लिये

35इसके संकेतानुसार इसके पीछे पीछे चलते हैं। सखियों के जलपूर्ण

36घड़े फोड़कर ये सब हँसते हुए भाग जाते है। गोपियों के गले

37की मुक्ता माल तोड़कर कहता है- जा मैया से मेरी शिकायत

38कर दे। सखियाँ यशोदा को उनके अनोखे लाल की करतूतें

39बताते हुए पुनः कहती हैं- हे मैया! यह सखियों से कहता है-

40““तेरी मेरी जोड़ी अच्छी बनेगी””। ऐसा कहकर बलपूर्वक हास

41परिहासपूर्ण चेष्टायें करता है। हे यशोदे! तुमने वृद्धावस्था में

42पुत्र को जन्म क्या दिया- लाड़ करके इसे सिर चढ़ा लिया-

43इसलिये यह इतना बिगड़ गया है। देखने में यह कृष्ण अभी

44छोटा लगता है परन्तु है अत्यन्त खोटा। पुनः गोपी यशोदा को

45चेतावनी देते हुए कहती हैं- हे यशोदे! तनिक अपने पुत्र के

46भविष्य के विषय में सोेचो। जब अभी से उसका यह हाल है

47तब आगे चलकर यह क्या न करेगा? जब गोपियाँ घर से दही

48बेचने निकलती हैं, तब मार्ग में यह उन्हें रोककर कहता है-

49“मैं ब्रजराज हूँ अतः मुझे दही का दान दो”। जब कोई गोपी

50दही का दान नहीं देती तब यह उसके दही के पात्र को फोड़

51डालता है।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Ras scan is a separate source, not the scan transcribed here. Supplied edition: Fourth edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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