लोड हो रहा है…लोड हुँदैछ…
Skip to main content
Yugal Ras

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

नटवारी छवि प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

Reading 54 of 119 · Source no. 43 · Source PDF 96–98

1नटवारी छवि प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

2मोर मुकुट लट अति घुँघुरारी,

3मृगमद तिलक सँवारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

4श्रुति कुंडल छवि मुनि मन हारी,

5नासा बेसर प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

6अँखियाँ सुधा गरल मधु वारी,

7दृग चितवनि बलिहारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

8मधुर मधुर मृदु मुसुकनि प्यारी,

9लखि न मोह को नारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

10कंध लकुटि अरु कामरि कारी,

11कर कंकन छवि न्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

12गल गुंजन माला बलिहारी,

13बनमाला छवि न्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

14झलमलात दुपटी दुति प्यारी,

15कौस्तुभ मणि छवि न्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

16कनकन किंकिनि धुनि झनकारी,

17कटि काछनी प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

18पीत वसन दुति दमकनि प्यारी,

19पग नूपुर धुनि न्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

20कहि न जात गति अति मतवारी,

21हंस लजावनि वारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

22कोटि अनंग अंग प्रति वारी,

23लखि प्यारिहुँ बलिहारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

24लखि “कृपालु” नटवर छवि प्यारी,

25नटवरहूंँ बलिहारी, प्यारी प्यारी प्यारी॥

26भावार्थ—नटवर वेष धारी श्री कृष्ण की प्यारी छवि

27का कौन वर्णन कर सकता है- सिर पर मोर-पंख का अनोखा

28मुकुट धारण किये हैं। केशों की लट घुँघराली है। मस्तक पर

29कस्तूरी का तिलक है। कानों में कुंडल शोभा पा रहे हैं। जिन्हें

30देखकर मुनियों का मन भी मोहित हो जाता है। नासिका में

31बुलाक हिल रही है। नेत्र अमृत विष एवं मदिरा से परिपूर्ण हैं।

32(श्वेतिमा अमृत, श्याम पुतली की कालिमा विष एवं कोरों की

33लालिमा ही मदिरा है) उन नेत्रों की अनोखी चितवनि पर रसिक-

34जन बलिहार जाते हैं। त्रिभुवन में ऐसी कौन सी स्त्री हैं जो श्री

35कृष्ण की मृदु मुस्कान की मधुरिमा पर मोहित न हो जाय?

36युगल स्कंधों पर लकुटी और कामरी है। करों के कंकणों की

37छवि तो अनुपम हैं। गले की गुंजमाला एवं वनमाला की छवि

38पर भक्त-जन अपना सर्वस्व निछावर करते हैं। पीला दुपट्टा

39झलमल कर रहा है। कम्बु-कण्ठ कौस्तुभ मणि से सुशोभित

40है। सूक्ष्म कटि-प्रान्त पर सुन्दर कछनी कसे हैं। स्वर्ण किंकिणी

41की झनकार निराली ही है। श्याम-तन पर पीताम्बर की दमक

42है। चरणों में नूपुरों की रुनझुन है। मतवाली चाल अकथनीय

43हैं। हंस भी उसे देखकर लज्जित हो जाते हैं। एक एक अंग पर

44करोड़ों कामदेव निछावर किये जा सकते हैं। प्यारी राधा भी

45इस छवि को निहारकर बलिहार जाती हैं।“कृपालु”कहते हैं

46-स्वयं श्री कृष्ण भी अपनी छवि को निहारकर बलिहार जाते

47हैं।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Ras scan is a separate source, not the scan transcribed here. Supplied edition: Fourth edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

Source edition and PDF · Text version