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Yugal Ras

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

अब न कहौं तोय मैया, मैया मैया मैया।

Reading 44 of 119 · Source no. 33 · Source PDF 77–79

1अब न कहौं तोय मैया, मैया मैया मैया।

2सबै सखन सँग भैया मैया,

3मोय रुवावत मैया, मैया मैया मैया।

4कारो कारो कहि कहि मैया,

5नचत सखन हँसि मैया, मैया मैया मैया।

6प्रथम कहत रह कनुवा मैया,

7अब कह कलुवा मैया, मैया मैया मैया।

8तू इनकी सब मानति मैया,

9मेरी सुनति न मैया, मैया मैया मैया।

10ले अपनी यह लकुटी मैया,

11ले यह कामरि मैया, मैया मैया मैया।

12अब गैयान चरावन मैया,

13कभू जाउँ नहिं मैया, मैया मैया मैया।

14तेरी गोद न अइहौं मैया,

15नवनि न खैहौं मैया, मैया मैया मैया।

16तोसों प्यार न करिहौं मैया,

17और बनैहौं मैया, मैया मैया मैया।

18मोते कहत सखन सब मैया,

19परो मिल्यो तू मैया, मैया मैया मैया।

20तू भी सुनत न मोरी मैया,

21करति न गोरो मैया, मैया मैया मैया।

22करिहौं करिहौं कहि कहि मैया,

23मोहिं भुरावति मैया, मैया मैया मैया।

24अब “कृपालु” जोगी बनि मैया,

25अलख जगैहौं मैया, मैया मैया मैया॥

26भावार्थ—भोले भाले बालकृष्ण यशोदा से कहते हैं-

27अरी मैया! मैं अब कभी तुमको अपनी मैया कहकर नहीं बोलूँगा।

28बलदाऊ भैया सखाओं के साथ मिलकर मुझे रुलाते हैं। सखा

29मण्डली मुझे काला काला कहकर हँसते हुए नाचती है। पहले

30तो ये सब मुझे “कनुआ” कहकर सम्बोधित करते थे, अब तो

31“कलुवा” कहकर पुकारते है। अरी मैया! तुम भी तो दाऊ भैया

32और सखाओं की बात को ही सत्य मानती हो, मेरी बात तो

33सुनती ही नहीं हो। मैया! अपनी लकुटी और कामरी ले लो! मैं

34अब कभी गाय चराने नहीं जाऊँगा। न तो मैं अब तुम्हारी गोद

35में ही कभी आऊँगा और न माखन खाऊँगा। मैं अब तुमसे प्यार

36नहीं करूँगा कोई दूसरी मैया बना लूँगा। सखा-गण मुझसे कहते

37हैं- कि मैं तुमको कहीं पड़ा मिला था। मैं तुम्हारा वास्तविक

38पुत्र नहीं हूँ। तुम मेरी माँ होती तो मेरी बात मानतीं। मैं तुमसे

39कहता हूँ कि मुझे काले से गोरा बना दो, किंतु तुम कहती तो

40रहती हो कि गोरा बना दूँगी परन्तु अभी तक तुमने मुझे गोरा

41नहीं बनाया। तुम मुझे धोखा देती रही हो। कन्हैया के शब्दों में

42“कृपालु”ने मैया से कहा- अब मैं घर से निकलकर योगी

43बनकर अलख जगाऊँगा।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Ras scan is a separate source, not the scan transcribed here. Supplied edition: Fourth edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

Source edition and PDF · Text version