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Yugal Ras

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

मातु जगावत कान्हा, कान्हा कान्हा कान्हा।

Reading 43 of 119 · Source no. 32 · Source PDF 75–77

1मातु जगावत कान्हा, कान्हा कान्हा कान्हा।

2भई भोर उठु उठु रे कान्हा,

3उठे ग्वाल सब कान्हा, कान्हा कान्हा कान्हा।

4माखन मिश्री रोटी कान्हा,

5मुख धो खा ले कान्हा, कान्हा कान्हा कान्हा।

6धनसुख मनसुख आदिक कान्हा,

7द्वार पुकारत कान्हा, कान्हा कान्हा कान्हा।

8कहत ग्वाल चलु चलु रे कान्हा,

9गोचारण हित कान्हा, कान्हा कान्हा कान्हा।

10यदि किय बेर जात हम कान्हा,

11रहु घर इकलो कान्हा, कान्हा कान्हा कान्हा।

12हारि कह्यो मैया सुनु कान्हा,

13कान खोलि निज कान्हा, कान्हा कान्हा कान्हा।

14सबरो माखन दाउहिँ कान्हा,

15जात खवावन कान्हा, कान्हा कान्हा कान्हा।

16ऊँ ऊँ करत उठत नहिं कान्हा,

17तानि पीत पट कान्हा, कान्हा कान्हा कान्हा।

18पुनि कह मैया तेरी कान्हा,

19बनौं न मैया कान्हा, कान्हा कान्हा कान्हा।

20दाऊ की ही मैया कान्हा,

21हौँ बनिहौँ अब कान्हा, कान्हा कान्हा कान्हा।

22जब मैया कह आई कान्हा,

23भानुकुँवरि लखु कान्हा, कान्हा कान्हा कान्हा।

24तब “कृपालु” उठि बैठे कान्हा,

25लखत चहूँ दिशि कान्हा, कान्हा कान्हा कान्हा॥

26भावार्थ—यशोदा मैया बालकृष्ण को जगाती हुई कहती

27हैं-अरे कनुआ! शीघ्र उठ। प्रातःकाल हो गया। ग्वाल बाल

28उठकर तुझे बुला रहे हैं। मुख धोकर माखन रोटी खा ले। तेरे

29सखा-गण-धनसुख, मनसुख आदि द्वार पर तेरी प्रतीक्षा कर

30रहे हैं। गोचारण का समय हो चुका अतः ग्वाल बाल शीघ्रता

31करने को कह रहे हैं। कन्हैया को विलम्ब करते देखकर ग्वाल-

32बाल कहने लगे-कन्हैया! अधिक विलम्ब करोगे तो हम सब

33तुम्हें अकेला छोड़कर वन को चले जायेंगे। यशोदा मैया ने

34देखा किसी प्रकार से भी कृष्ण शैया का त्याग नहीं करते तो

35कहने लगीं- कन्हैया! कान खोलकर सुन लो। मैं सम्पूर्ण माखन

36दाऊ को खिला दूँगी। कन्हैया फिर भी नहीं उठे। ऊँ ऊँ करते

37हुए पीताम्बर तानकर सो गये। मैया ने कहा- मैं तेरी मैया नहीं

38बनूँगी, मैं तो दाऊ की ही मैया बनूँगी। पुनः यशोदा कहने लगीं

39अरे कान्हा! देख राधा आ गई।“कृपालु”जी कहते हैं कि श्री

40राधा का आगमन सुनकर कन्हैया चारों दिशाओं की ओर देखते

41हुए उठ बैठे।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Ras scan is a separate source, not the scan transcribed here. Supplied edition: Fourth edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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