Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
राधे राधे गोविन्द गोविन्द राधे।
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1(हमारी राधेरानी रस की खानी)
2राधे राधे गोविन्द गोविन्द राधे।
3तुम भी नाहिं भूलो मोहिं गोविन्द राधे,
4मैं भी तोहिं भूलूँ नहिं गोविन्द राधे।
5अपनी ओर लखु गोविन्द राधे,
6मेरी ओर लखो जनि गोविन्द राधे।
7तू ही मेरा तू ही मेरा गोविन्द राधे,
8मैं भी तेरा मैं भी तेरा गोविन्द राधे।
9तू ही तो अगति गति गोविन्द राधे,
10मेरी भी तो तू ही गति गोविन्द राधे।
11तू ही तो है सतघन गोविन्द राधे,
12तू ही तो है चितघन गोविन्द राधे।
13तू ही तो है सुखघन गोविन्द राधे,
14तू ही मेरा मैं भी तेरा गोविन्द राधे,
15काहे को भुलायो मोहिं गोविन्द राधे।
16मो सो न पतित कोउ गोविन्द राधे,
17तू पतितपावन गोविन्द राधे।
18तू ही तो है स्वामी मेरा गोविन्द राधे,
19तू ही तो है सखा मेरा गोविन्द राधे।
20तू ही तो है सुत मेरा गोविन्द राधे,
21तू ही तो है पिय मेरा गोविन्द राधे।
22तू ही मेरा पालक गोविन्द राधे,
23मैं तो तेरा बालक गोविन्द राधे।
24तू ही तो है हितू मेरा गोविन्द राधे।
25तू ही मेरा माता पिता गोविन्द राधे,
26तोहिं सों है मेरा नाता गोविन्द राधे।
27त्वमेव शरणं मम गोविन्द राधे,
28बिगरी बना दे मेरी गोविन्द राधे।
29छोड़ूँ नहिं पाछा तोरा गोविन्द राधे,
30जैसा भी हूँ तेरा ही हूँ गोविन्द राधे।
31माया ने भुलाया तेरी गोविन्द राधे,
32तूने क्यों भुलाया मोहिं गोविन्द राधे।
33पिछला बिगारा मैंने गोविन्द राधे,
34अगला बना दे तू गोविन्द राधे।
35तुझसा खरा ना कहुँ गोविन्द राधे,
36मुझसा ना खोटा कहुँ गोविन्द राधे।
37तू ही मेरी गति मति गोविन्द राधे,
38तू ही तो “कृपालु” इक गोविन्द राधे॥