Skip to main contentJagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
युगलवर छवि लखि गई बलिहार।
Reading 56 of 75 · Source no. 45 · Source PDF 155–156
1(सखी इक, सपनो देख्यो रात)
2युगलवर छवि लखि गई बलिहार।
3कनक मुकुट मणिमय मंडित दोउ,
4लर मोतिन रिझवार।
5दोउ नासा मुक्ताहल सोहत,
6दोउ श्रुति कुण्डल धार।
7दोउ गल मणिन मोतियन हीरन,
8बहुरंगी हैं हार।
9दोउ कर कंकण दोउ कटि किंकिणि,
10दोउ पग नूपुर धार।
11दोउ चितवनि मुसकनि मृदु बोलनि,
12दोउ मन मोहन हार।
13एक नील तनु, एक गौर तनु,
14घन दामिनि अनुहार।
15एक पीत पट एक नील पट,
16मानहुँ छवि शंृगार।
17एक है नटखट एक है भोरी,
18नँदनंदन सुकुमार।
19इक “कृपालु” सिर मोर मुकुट इक,
20नासा नथ छविदार॥