Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
बलिहार गौर सरकार जेहि चाकर नंदकुमार।
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1(बलिहार युगल सरकार...)
2बलिहार गौर सरकार जेहि चाकर नंदकुमार।
3हम तो अधमन सरदार तुम अधम उधारन हार।
4हम अहंकार साकार तुम दीनन की रखवार।
5हम चह करुणा सरकार तुम करुणा की अवतार।
6हम चह अपनो अधिकार तुम दे दो दास्य हमार।
7हम भी हैं अंश तिहार तुम पर हमरो अधिकार।
8हम भिक्षुक माँगत प्यार तुम देहु प्यार उपहार।
9हम नहिं चह मुक्तिहुँ चार तुम अपनो मानि निहार।
10हम ऋणियाँ सदा तिहार तुम हो मम साहूकार।
11हम क्या दें भिक्षु तिहार तुम ही हो दाता हमार।
12हम करत जगत सों प्यार तुम प्रणत प्यार बलिहार।
13हम खात रात दिन मार तुम देखति मात हमार।
14हमने किये पाप अपार तुम हो पतितन पतवार।
15हम न्याय न चह दरबार तुम करहु कृपा सरकार।
16हम मानत नहिं आभार तुम किय अगनित उपकार।
17हम जग भटकत गये हार तुम ही सुनु पतित पुकार।
18हम चह सुत वित पति नार तुम चह इक मोहिँ उर धार।
19हम शिशु नवजात तिहार तुम समरथ मातु हमार।
20हम पर माया अधिकार तुम कहँ दिय जासु बिसार।
21हम आये शरण तिहार तुम राखो लाज हमार।
22हम जनम सूर सरकार तुम पकरहु हाथ हमार।
23हम तो अति निपट गमार तुम तो विधि मन बुधि पार।
24हम चहत टहल ब्रजनार तुम सुन लो विनय हमार।
25हम जानत भानुदुलार तुम कर पतितन सों प्यार।
26हम भटकि चुके सब द्वार तुम बिनु नहिं हितू हमार।
27हम मानत दोष हमार तुम परखत भुजन पसार।
28हम क्या बिनु कृपा तिहार तुमको को जाननिहार।
29हम अपराधन आगार तुम क्षमा रूप साकार।
30हम पाप रूप साकार तुम करुणा की अवतार।
31हम अज्ञ “कृपालु” बिसार तुम जनि निष्ठुरता धार॥