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Yugal Madhuri

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

जोइ वृषभानुनन्दिनी राधे,

Reading 32 of 75 · Source no. 21 · Source PDF 76–89

1(राधे राधे गोविन्दा भजो)

2जोइ वृषभानुनन्दिनी राधे,

3सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

4जाको नित्य धाम बरसानो,

5सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

6जाको रासस्थल वृंदावन,

7सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

8जोेइ श्री कीर्ति कुमारी राधे,

9सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

10जोइ कीरति की रति की मूरति,

11सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

12जाकी तनु छवि चम्पक वरनी,

13सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

14जाके कनक मुकुट सिर सोहत,

15सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

16जाके मुकुट मणिन दुति दमकति,

17सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

18जाके शीश चन्द्रिका सोहति,

19सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

20जेहि सिर चूनरि झलमल झलकति,

21सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

22जाके शीशफूल भल सोहत,

23सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

24जाके कच कारे घुँघरारे,

25सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

26जाकी वेणी फुलन अलंकृत,

27सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

28जाके सिर सिन्दूर सुशोभित,

29सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

30जेहि कानन कुंडल भल सोहत,

31सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

32जाके भाल लाल बिंदी छवि,

33सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

34जा नासा नथ बेसर हलकति,

35सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

36जाके सरस रसीले नैना,

37सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

38जाके नैन सहज कजरारे,

39सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

40जाके दृग रतनारे कारे,

41सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

42जाके नैन सैन पिय घायल,

43सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

44जाके दोउ कर कंकन सोहत,

45सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

46जाके कर चूरिन बहुरंगी,

47सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

48जाके कर करपत्र सुशोभित,

49सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

50जाके कर अँगुरिन मुँदरिन दुति,

51सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

52जाके पाणि रची मेहँदी भल,

53सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

54जाके नील वसन तन सोहत,

55सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

56जाके गर मणि मुक्तमाल भल,

57सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

58जाके उर कंचुकि नवरंगी,

59सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

60जाकी कटि किंकिनि धुनि रुनझुन,

61सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

62जाके पग पायल भल सोहत,

63सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

64जाके पद अँगुरिन बिछुवनि छवि,

65सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

66जाके चरण मिहावर सोहत,

67सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

68जोइ है सदा सुहागिनि श्यामा,

69सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

70जाकी तनु छवि रस नित नव नव,

71सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

72जेहि तनु क्षण क्षण वर्धमान रस,

73सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

74जा तनु छवि लखि छविहूँ लाजत,

75सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

76जो आपुन छवि आपुहिं मोहत,

77सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

78जाकी भोरे मुख की मुसकनि,

79सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

80जेहि भोरेपन पर बलि बलि पिय,

81सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

82जाकी चितवनि लखि पिय मुर्छित,

83सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

84जाकी गवनि गयंद लजावनि,

85सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

86जा छवि सुख कहँ सहि न सकत पिय,

87सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

88जाकी “हा हा” खात रहत पिय,

89सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

90जो कर मान छिनहिं छिन पिय सन,

91सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

92जाके सम कोई हुई न होगी,

93सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

94जाके सम या बड़ नहिं कोउ रस,

95सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

96जाको कहत रसिक रासेश्वरि,

97सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

98जाकी ब्रह्म करत अगवानी,

99सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

100जाके रोम रोम रस टपकत,

101सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

102जाके चरण पलोटत प्रियतम,

103सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

104जाकी पदरज धरत शीश पिय,

105सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

106जाके पद चिह्नन चूमत पिय,

107सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

108जाके चरण मुकुट धर प्रियतम,

109सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

110जाकी छवि लखि गिरत धरणि पिय,

111सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

112जाको लखि बलिहार कहत हरि,

113सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

114जाके पाछे जय बोलत पिय,

115सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

116जाको नाम गाव मुरलिहिं पिय,

117सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

118जग ठाकुर जाकर भये चाकर,

119सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

120जाकी करत चाकरी प्रियतम,

121सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

122जाकी भृकुटि विलोकत प्रियतम,

123सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

124जेहि डर डर डर सोउ गिरिधर जेहि,

125डर डर सोइ मम श्री राधे।

126बंक भृकुटि जेहि प्रलय बंक भौ,

127लख जेहि सोइ मम श्री राधे।

128जाको लाड़ लड़ावत नित पिय,

129सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

130जेहि रिझवत मनिहारिन बनि पिय,

131सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

132जेहि रिझवत लिलिहारिन बनि पिय,

133सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

134जाको रिझवत मालिनि बनि पिय,

135सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

136जाकी कर मनुहार नित्य पिय,

137सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

138जेहि खोजत रोवत कुंजन पिय,

139सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

140जाको चँवर ढुरावत प्रियतम,

141सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

142जाको व्यजन करत नित प्रियतम,

143सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

144जाकी डगर बुहारत प्रियतम,

145सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

146जाकी लेत बलैया प्रियतम,

147सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

148जाकी कृपा मनावत प्रियतम,

149सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

150जाकी दासिन पग पकरत पिय,

151सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

152जेहि लखि हा हा खात सखिन सों

153सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

154जेहि मानिनि लखि पिय तनु काँपत,

155सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

156जेहि लखि भूलत भगवत्ता पिय,

157सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

158जेहि लखि षडैश्वर्य भूलत पिय,

159सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

160जेहि लखि लखत रहत पिय इकटक,

161सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

162जेहि लखि पिय लग इकटक टकटकि,

163सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

164जेहि छायाहुँ लखि हरि मूर्छित,

165सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

166जेहि लखि भूलत पिय चंचलता,

167सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

168जेहि लखि भूलत लँगर लँगरई,

169सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

170जो जगमोहनहूँ मन मोहिनि,

171सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

172जाके आगे भिक्षुक बन पिय,

173सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

174जाकी याचत प्रेम भीख पिय,

175सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

176जो हैं महाभाव मादन तनु,

177सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

178जो हैं जगदीश्वरहूँ ईश्वरि,

179सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

180जाकी कृपा रसिकवर पिय भये,

181सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

182ब्रह्म रसहिं जो देत रास रस,

183सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

184जासु कृपा लहि कृपा करत पिय,

185सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

186जोइ परतत्व श्याम की स्वामिनि,

187सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

188जोइ परमात्मा की हैं आत्मा,

189सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

190जेहि राधे बिनु श्यामहुँ आधे,

191सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

192जेहि बिनु पलक कलप सम लग पिय,

193सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

194जेहि सँग कलप पलक सम लग पिय,

195सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

196जोइ जग स्वामिहुँ श्यामहुँ स्वामिनि,

197सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

198जोइ श्री वृन्दाविपिन विहारिणि,

199सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

200जाको पार न पायो प्रियतम,

201सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

202जाकी नख दुति ब्रह्म कहावत,

203सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

204जाकी उमा रमा है किंकरि,

205सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

206जाकी महल टहल चह प्रियतम,

207सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

208जाके सँग सँग अष्ट महासखि,

209सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

210जेहि गुन गावत नहिं अघात पिय,

211सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

212जेहि अगनित गुन नहिं गन सक पिय,

213सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

214जाको तनु सत चित आनँदघन,

215सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

216जापर पिय निज प्रानन वारत,

217सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

218जाकी करत आरती प्रियतम,

219सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

220जाको पियहिं मनावत बीतत,

221सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

222जोइ गहवरवन विहरत सखि सँग,

223सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

224जाके धाम मुक्ति पनिहारिनि,

225सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

226जेहि पदरज हित कमला किय तप,

227सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

228जाकी ब्रजलीला नित नव नव,

229सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

230जाको नाम परम धन प्रियतम,

231सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

232जाको नाम श्याम जप सपनेहुँ,

233सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

234जो निज जन क्रन्दन सुनि भाजति,

235सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

236जो पतितन को हृदय लगावति,

237सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

238जाको नेति नेति श्रुति गावत,

239सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

240जाको वेद अगम्य बतावत,

241सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

242जामें देही देह भेद नहिं,

243सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

244जो हैं प्रेम रूप रस अम्बुधि,

245सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

246जाकी दासी की दासी श्रुति,

247सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

248जेहि मादन रस हित पिय तरसत,

249सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

250जेहि लखि छुट नटखट नटखटपन,

251सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

252जाको अन्त न पावत आपुहुँ,

253सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

254जो हैं शुद्ध सत्व की स्वामिनि,

255सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

256जो हैं ह्लादिनि सार सार तनु,

257सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

258जाके सम “कृपालु” नहिं प्रियतम,

259सोइ मम स्वामिनि श्री राधे।

Original Hindi songs from the supplied standalone Yugal Madhuri edition. This is distinct from Prem Ras Madira's similarly named chapter. Frontmatter retains its own source credits. Supplied edition: Fifth edition, Gita Jayanti, 28 November 2009.

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